Jharkhand : अंधविश्वास में लड़ते रहे दो गांव के लोग, थाना प्रभारी ने खुद दिया अर्थी को कांधा; कराया अंतिम संस्कार

Bindash Bol

* अंधविश्वास के आगे थम गई थी एक अर्थी… फिर पुलिसवाले ने दिया कंधा और इंसानियत जीत गई

Jharkhand : झारखंड के लोहरदगा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून लागू करने के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत निभाने के लिए भी होती है। सेन्हा थाना क्षेत्र में अंधविश्वास के कारण एक वृद्ध की अंतिम यात्रा बीच रास्ते में रुक गई थी। दो गांवों के लोग श्मशान घाट पर आमने-सामने थे और एक शव के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा था।

मामला पारही डांड़ी टोली और अलौदी गांव के बीच का था। पारही डांड़ी टोली के एक बुजुर्ग का निधन हो गया था। परिजन जब गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तभी अलौदी गांव के कुछ ग्रामीण वहां पहुंच गए। उनका कहना था कि दूसरे गांव का शव यहां जलाने से गांव में भूत-प्रेत और आत्माओं का प्रकोप बढ़ेगा। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दुख की इस घड़ी में भी परिजनों को अपनों का अंतिम संस्कार करने से रोक दिया गया।
सूचना मिलते ही सेन्हा थाना प्रभारी नीरज झा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक समझाया कि अंधविश्वास के नाम पर किसी मृतक के सम्मानजनक अंतिम संस्कार में बाधा डालना न तो उचित है और न ही मानवीय।

जब ग्रामीण उनकी बात मान गए, तो थाना प्रभारी ने सिर्फ विवाद खत्म कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी। उन्होंने खुद अर्थी को कंधा दिया, श्मशान घाट तक साथ चले और अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न कराई। पुलिस अधिकारी का यह मानवीय चेहरा वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया।

आज पूरे इलाके में थाना प्रभारी नीरज झा की इस संवेदनशील पहल की चर्चा हो रही है। यह घटना सिर्फ एक विवाद के समाधान की नहीं, बल्कि इस बात की मिसाल है कि जब अंधविश्वास और मानवता आमने-सामने हों, तो जीत हमेशा इंसानियत की होनी चाहिए।

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