NCERT : NCERT की 9वीं की नई किताब में बड़े बदलाव… समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की विस्तृत व्याख्या हटाई, अब SIR और आपातकाल पर मिलेगा नया अध्याय

Siddarth Saurabh

NCERT : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ जारी कर दी है। इस पुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। संविधान की प्रस्तावना में शामिल समाजवाद (Socialist), धर्मनिरपेक्षता (Secular), लोकतंत्र (Democratic) जैसे शब्दों की पहले दी जाने वाली विस्तृत व्याख्या हटा दी गई है। इसके साथ ही छात्रों को अब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और आपातकाल (Emergency) जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे।

संविधान की प्रस्तावना रहेगी, लेकिन विस्तृत व्याख्या नहीं

नई किताब में संविधान की प्रस्तावना को यथावत रखा गया है, लेकिन उसमें शामिल प्रमुख शब्दों—Sovereign, Socialist, Secular, Democratic, Liberty, Equality और Fraternity—की पहले की तरह विस्तृत व्याख्या अब नहीं दी गई है। पहले इन अवधारणाओं को उदाहरणों के साथ समझाया जाता था, जिसे नए संस्करण में सीमित कर दिया गया है।

अब छात्र पढ़ेंगे SIR क्या है

नई पुस्तक में पहली बार Special Intensive Revision (SIR) को शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन रखने के लिए यह प्रक्रिया अपनाता है, ताकि कोई पात्र मतदाता छूट न जाए और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। किताब के अनुसार, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, जबकि मृत्यु, निवास परिवर्तन, दोहरे पंजीकरण या अन्य त्रुटियों के मामलों में नाम हटाए जाते हैं। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने से पहले दावे और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं।

वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा को मिला स्थान

नई सोशल साइंस पुस्तक में भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष जोर दिया गया है। छात्रों को अब ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। पुस्तक में इन्हें भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए धर्म, दर्शन, शिक्षा, संगीत और जीवन मूल्यों से उनके संबंध को समझाया गया है।

आपातकाल और महिला आरक्षण पर नए अध्याय

NCERT ने पुस्तक में 1975 के आपातकाल पर नया अध्याय भी जोड़ा है। इसके अलावा महिला आरक्षण पर भी अलग से चर्चा की गई है। पुस्तक में बताया गया है कि मतदान में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बताया गया है।

क्या बदला है?

  • संविधान की प्रस्तावना में प्रमुख शब्दों की विस्तृत व्याख्या हटाई गई।
    •• पहली बार SIR (Special Intensive Revision) को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।
    •• आपातकाल पर नया अध्याय जोड़ा गया।
    •• वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में स्थान मिला।
    •• महिला आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी पर नया अध्याय शामिल किया गया।

नई किताब के इन बदलावों को लेकर शिक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे पाठ्यक्रम के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे वैचारिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment