Ram Mandir : राम मंदिर चढ़ावा चोरी: इस्तीफों से मचा भूचाल, 8 आरोपी जेल में… अब बचेंगे कौन?

Bindash Bol

Ram Mandir : … राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में क्या-क्या हुआ?

Ram Mandir : राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में हर गुजरते दिन के साथ नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जिस मंदिर में श्रद्धालु भगवान के चरणों में आस्था का धन चढ़ाते थे, वहीं उस चढ़ावे पर कथित डकैती की परतें अब एक-एक कर खुल रही हैं। शुक्रवार का दिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा साबित हुआ। पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दिया, फिर आठों आरोपियों को अदालत ने जेल भेज दिया और उसके बाद जांच में लगभग 79.85 लाख रुपये की बरामदगी का दावा सामने आया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ संदेश दिया है कि राम मंदिर के नाम पर हुई किसी भी कथित गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी सख्त रुख के बाद SIT ने जांच तेज की और 25 जून को पहली FIR दर्ज हुई। आठ लोगों को नामजद किया गया, जबकि कई अन्य संदिग्धों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

CCTV ने खोली पोल

जांच एजेंसियों का दावा है कि 27 अप्रैल से 5 जून तक की CCTV फुटेज में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। आरोप है कि नोटों की गिनती के दौरान कर्मचारी नकदी और जेवर जेबों में भरकर बाहर ले जाते दिखाई दिए। यही फुटेज अब जांच का सबसे मजबूत हथियार बन चुकी है।

80 लाख की रिकवरी, लेकिन सवाल अभी बाकी

SIT के मुताबिक सात आरोपियों की निशानदेही पर करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। लवकुश मिश्रा के घर से ही लगभग 10 लाख रुपये मिलने का दावा किया गया है। हालांकि आठवें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई नकदी नहीं मिली, लेकिन पुलिस का कहना है कि वह पूरे कथित षड्यंत्र का अहम हिस्सा था।

सिस्टम की लापरवाही या सुनियोजित खेल?

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि नोट गिनने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी खत्म होने के बाद न तो तलाशी ली जाती थी और न ही कोई प्रभावी निगरानी होती थी। वाउचर सिस्टम में कथित हेराफेरी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जेल पहुंचे सभी आरोपी

अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अब पुलिस 29 जून को रिमांड मांग सकती है ताकि पूरे नेटवर्क का सच सामने आ सके।

सबसे बड़ा सवाल…

क्या यह सिर्फ आठ लोगों की करतूत थी, या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? इस्तीफे, करोड़ों की कथित गड़बड़ी, CCTV के दावे और लगातार हो रही बरामदगी ने इस मामले को देश के सबसे चर्चित मामलों में ला खड़ा किया है। अब सबकी निगाहें SIT की अगली कार्रवाई और जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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