Akhilesh Yadav : अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के बाद समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को निशिकांत दुबे को मानहानि का लीगल नोटिस भेज दिया।
इससे पहले अखिलेश यादव ने दुबे को 10 मिनट के भीतर अपनी पोस्ट हटाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि निर्धारित समय में पोस्ट नहीं हटाई गई तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पोस्ट नहीं हटने के बाद अब सपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष केके पाल के माध्यम से औपचारिक मानहानि नोटिस जारी कर दिया है।
नोटिस में क्या कहा गया?
लीगल नोटिस में निशिकांत दुबे से विवादित पोस्ट तत्काल हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ऐसे आरोप साझा करने वाले अन्य लोगों को भी पोस्ट हटाने और माफी मांगने की चेतावनी दी गई है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत 5 जुलाई को हुई, जब निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में दावा किया गया था कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी टिन्नू यादव का समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से नियमित संपर्क था। पोस्ट में कथित पुलिस जांच और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड का हवाला दिया गया था। इसे साझा करते हुए दुबे ने सवालिया अंदाज में टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा गया।
अखिलेश यादव ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा बताते हुए इसे समाजवादी पार्टी की छवि खराब करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम की आस्था और संसदीय मर्यादा से जुड़े विषय पर इस तरह की भ्रामक बातें फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
पुलिस में भी पहुंचा मामला
इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इटावा के फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में निशिकांत दुबे समेत कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना किसी प्रमाण के भ्रामक दावे प्रसारित कर पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
निशिकांत दुबे का पलटवार
अखिलेश यादव की चेतावनी के बाद निशिकांत दुबे भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि, “इतनी बेचैनी क्यों है? मैंने तो सिर्फ एक सवाल पूछा था। 1990 में राम भक्तों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था? मैं अदालत जाऊंगा।”
अब यह सियासी विवाद सोशल मीडिया की बहस से निकलकर कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले पर अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।