JPSC : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में एक बार फिर धांधली और भ्रष्टाचार के जिन्न ने बाहर आकर पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) में गड़बड़ी के गंभीर आरोपों के बीच मंगलवार को जैसे ही CID और रांची पुलिस ने JPSC दफ्तर पर धावा बोला, आयोग के अंदर हड़कंप मच गया। कार्रवाई के कुछ ही घंटों के भीतर अध्यक्ष एल खियांग्ते ने चुपचाप अपना इस्तीफा सौंप दिया—जिसने आयोग की साख पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।
पूर्व मुख्य सचिव की ‘विदाई’ पर उठे गंभीर सवाल
फरवरी 2025 में बड़े तामझाम के साथ राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते को JPSC की कमान सौंपी गई थी। लेकिन महज कुछ महीनों के भीतर ही परीक्षा प्रणाली में लगी ‘सेंध’ और CID की दबिश ने उनके कार्यकाल का इतना शर्मनाक अंत कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस्तीफा सौंपे जाने के बाद भी न तो सरकार और न ही आयोग के पास इस पर कोई जवाब देते बन रहा है—हर तरफ आपराधिक चुप्पी छाई हुई है!
JPSC से लेकर परीक्षा एजेंसी तक CID का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
मंगलवार शाम CID और पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय में डेरा डाल दिया। घंटों तक चले इस सर्च ऑपरेशन में ओएमआर शीट, कंप्यूटर रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और गोपनीय दस्तावेजों की जमकर छानबीन की गई। इस दौरान JPSC दफ्तर को लगभग सील जैसी स्थिति में रखा गया।
इतना ही नहीं, CID ने धांधली की जड़ तक पहुँचने के लिए परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के ठिकानों पर भी जोरदार छापेमारी की। एजेंसी के दफ्तर से हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और कई गोपनीय डायरियाँ जब्त कर दफ्तर पर ताला जड़ दिया गया है।
तीन गिरफ्तार, आला अफसरों पर कसता शिकंजा
छापेमारी के तुरंत बाद पुलिस ने परीक्षा एजेंसी से जुड़े तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है, जिनसे गुप्त ठिकाने पर कड़ी पूछताछ चल रही है। उधर, CID ने JPSC की सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत कई अफसरों को आड़े हाथों लिया और घंटों तक सवालों की बोछार की। साफ है कि इस खेल में कई ‘बड़े मगरमच्छ’ शामिल हैं, जिन पर जल्द गाज गिरना तय माना जा रहा है।
छात्रों के आक्रोश से थर्राई सरकार
14वीं JPSC PT का रिजल्ट आते ही सूबे के अभ्यर्थियों ने मोर्चा खोल दिया था। ओएमआर शीट में हेरफेर, कट-ऑफ में फर्जीवाड़े और पारदर्शिता के जनाजे को लेकर युवा सड़कों पर उतर आए थे। विपक्ष के तीखे हमलों और छात्रों के उग्र प्रदर्शन ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई शुरू हुई है।
लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस महाघोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। CID की इस कार्रवाई और अध्यक्ष के भाग खड़े होने से साफ है कि JPSC में पारदर्शिता का दावा महज एक ढोंग था!