Tariff : अमेरिका ने भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन, कनाडा, बांग्लादेश समेत 17 देशों से आयात होने वाले कुछ सामानों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह फैसला लागू किया। यह घोषणा सभी देशों पर लागू अतिरिक्त 10% टैरिफ की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले की गई।
जबरन मजदूरी बना टैरिफ की वजह
USTR के मुताबिक, जिन देशों पर यह टैरिफ लगाया गया है, वे जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने और उसके नियमों को लागू करने में पर्याप्त कदम नहीं उठा सके। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम है।
ग्रीर ने कहा कि यह कार्रवाई श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और वैश्विक व्यापार में अनुचित प्रथाओं को रोकने की शुरुआत है।
भारत को मिली राहत
भारत पहले उन देशों की श्रेणी में शामिल था, जिन पर 12.5% टैरिफ प्रस्तावित था। हालांकि, अब भारत पर 10% टैरिफ लागू किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि जून में प्रस्तावित टैरिफ के बाद भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन करते हुए जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह बदलाव 14 जून से प्रभावी हुआ।
ट्रंप प्रशासन ने क्यों उठाया कदम?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप प्रशासन द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए पिछले पारस्परिक टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने नए कानूनी आधार के तहत धारा 301 के अंतर्गत जांच शुरू की और अब 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है।
भारत ने जताई आपत्ति
भारत ने USTR की दोनों जांचों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) वार्ता के माध्यम से किया जाना चाहिए।
भारत-अमेरिका व्यापार कितना बड़ा?
अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर का था।
अमेरिका के इस फैसले का असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और जारी व्यापार समझौता वार्ता पर पड़ सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान कैसे निकालते हैं।