Jharkhand Students Protest : झारखंड छात्र आंदोलन और हिप्पोक्रेसी !

Bindash Bol

Jharkhand Students Protest : झारखंड में छात्र आंदोलन अपने चरम पर है। बेरोजगार युवा सड़क पर हैं और सरकार मंथन कर रही है। हालांकि सरकार ने कुछ ही साल पहले पेपरलीक के मामले को लेकर सख्त कानून बना चुकी है… मगर.।

आप सभी को याद होगा की तीन साल पहले याने 2023 में इसी समय मल्लब अगस्त महीने में भी छात्रों का खूब आंदोलन हो रहा था .. JSSC-CGL में हुए धांधली और पेपरलीक को ले कर।
छात्र/छात्राओं के गुस्से को देखते हुए हेमंत सोरेन आश्वासन दिया कि हम पेपरलीक के ऊपर सख्त कानून लाएंगे।

विधानसभा के मानसून सत्र शुरू होते ही हेमंत सोरेन की सरकार ने 3 अगस्त 2023 को विधानसभा में ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023’ लाया, और विधानसभा में ये बिल बीजेपी के हंगामे के बीच पारित हो गया। 29 नवंबर 2023 को राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही इसका गजट प्रकाशित किया गया।

ये कानून देखने-सुनने में तो बड़ा सख्त लगता है.. जैसा अभी केंद्र सरकार ने बिल पास किया न पेपर लीक के ऊपर बस वैसा ही। इसलिए जेएमएम वाले बोल भी रहे थे कि हमारे कानून को केंद्र सरकार ने कॉपी किया है। इस कानून में पेपरलीक से संबंधित सजा के रूप में उम्रकैद और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

“इस कानून में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सुरक्षा में सेंध, परीक्षा कराने वाली एजेंसी, प्रिंटिंग प्रेस, परीक्षा केंद्र, सेवा प्रदाता या परीक्षा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत को बेहद गंभीर अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की जेल, जो आजीवन कारावास तक हो सकती है। साथ ही 1 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

अगर कोई संगठित गिरोह बनाकर पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करता है, तो उसके लिए भी 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और 2 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

वहीं प्रश्नपत्र चोरी करना, ओएमआर शीट या उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ करना या उन्हें अवैध तरीके से हासिल करना जैसे मामलों में 7 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है…।”

ये कानून बना, लागू हुआ और यूपी में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी TDPL को ठेका दे दिया गया झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन का। सरकार ने इस एजेंसी को तमाम अधिकार दिए। सरकार ने ओटीआर (OTR) बोले तो वन टाइम रजिस्ट्रेशन से लेकर फाइनल रिजल्ट प्रोसेसिंग तक का जिम्मा इस एजेंसी को सौंप दिया।

गौरतलब है कि पहले के परीक्षा प्रणाली में कई स्तरों पे सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती थी। प्री-प्रोसेसिंग, पोस्ट-प्रोसेसिंग, कॉन्फिडेंशियल प्रिंटिंग, डेटा प्रोसेसिंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसे कार्य अलग-अलग एजेंसियों को दिए जाते थे जिसके उद्देश्य होता था कि किसी एक एजेंसी के पास पूरी परीक्षा का नियंत्रण न रहे। ताकि परीक्षा की गोपनीयता बनी रही।
लेकिन सरकार ने TDPL को OTR से ले के फाइनल रिजल्ट प्रोसेसिंग के बीच 8 प्रोसेसिंग का जिम्मा पूरी तरह इन्हें ही सौंप दिया।

अब देखिए कमाल…

मई, 2025 में JSSC ने बड़े पैमाने पे TDPL में अनियमितता पाई.. फलस्वरूप JSSC ने इसे ब्लैकलिस्ट कर दिया। सरकार ने एजेंसी को कानून के दायरे में नहीं रखा। थर-थर कांपने वाले इस कानून से एजेंसी को राहत मिल गई। और कमाल की बात तो तब हो गई जब JSSC ने इस TDPL को 2025 में ब्लैकलिस्ट किया और फिर इसी TDPL को JPSC इस वर्ष अपना एग्जाम करवाने का ठेका दे दिया…।

गौरतलब है कि JPSC और JSSC ये दोनों संस्थाएं सरकार के अधीन है..। एक संस्था TDPL को ब्लैकलिस्ट करती है वहीं दूसरी संस्था उससे काम भी लेती है। अभी झारखंड सरकार के पास बड़ा ही सख़्त और कड़ा कानून है.. मुख्य अभियुक्त से लेकर अन्य सहयोगी धरे जा चुके है..। मगर अभी भी सभी कानून के दायरे से बाहर है।

Share This Article
Leave a Comment