Divyastra Mk3 : भारतीय रक्षा क्षेत्र ने स्वदेशी तकनीक के दम पर आधुनिक युद्धनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। भारतीय डिफेंस स्टार्टअप ‘कावा स्पेस’ (Kawa UAV) ने देश के पहले पूर्णतः स्वदेशी जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन ‘दिव्यास्त्र Mk3’ का सफल परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। यह सिर्फ एक ड्रोन नहीं, बल्कि हवा में तैरता हुआ बारूद है जो दुश्मन के रडार को चकमा देकर उसके ठिकाने को मलबे के ढेर में बदलने की ताकत रखता है।
क्या है यह घातक ‘कामिकाजी’ हथियार?
लॉइटरिंग म्यूनिशन यानी ‘आत्मघाती शिकारी’। यह आसमान में बाज की तरह मंडराता है, रियल-टाइम में दुश्मन के ठिकानों और बख्तरबंद वाहनों की पहचान करता है, और सही मौका मिलते ही बिजली की रफ्तार से खुद को सीधे टारगेट पर क्रैश कर देता है।
‘दिव्यास्त्र Mk3’ क्यों बना है दुश्मन का सबसे बड़ा सिरदर्द?
* 100% मेड इन इंडिया पॉवर: एयरफ्रेम से लेकर टर्बोजेट इंजन, एआई ऑटोनॉमी और वॉरहेड तक—इस हथियार का एक-एक पुर्जा पूरी तरह भारत में बना है। विदेशी निर्भरता अब बीते दौर की बात हो चुकी है।
* जेट इंजन की प्रचंड रफ्तार: आम प्रोपेलर वाले सुस्त ड्रोनों के उलट, इसमें टर्बोजेट इंजन लगा है। यह इसे तेज रफ्तार, लंबी रेंज और भारी पेलोड ले जाने की बेजोड़ क्षमता देता है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस को संभलने का एक सेकंड भी नहीं मिलता।
* AI-पावर्ड ‘हंट एंड किल‘: इसमें उन्नत ऑटोनॉमस फ्लाइट कंट्रोल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टारगेट ट्रैकिंग दी गई है, जो आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग के बीच भी पिन-पॉइंट एक्यूरेसी सुनिश्चित करती है।
* रिकॉर्ड स्पीड में निर्माण: भारतीय डिफेंस इनोवेशन का लोहा मनवाते हुए इसे महज एक साल के भीतर ड्राइंग बोर्ड से आसमान तक उतार दिया गया।
रणनीतिक मोर्चे पर भारत का दबदबा
दिव्यास्त्र Mk3 की यह उड़ान एलओसी से लेकर एलएसी तक भारत की सर्जिकल और प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को कई गुना मजबूत करती है। यह हथियार स्पष्ट संकेत है कि अब भारतीय सेनाएं सीमा पार गहराई में बैठे दुश्मनों पर बिना किसी जोखिम के सटीक और घातक वार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।