Reservation : जंतर-मंतर पर नया संग्राम… क्या विरोध प्रदर्शन की इजाजत में भी चल रहा है ‘आरक्षण’?

Bindash Bol

Reservation :  देश की राजधानी का ऐतिहासिक धरना स्थल ‘जंतर-मंतर’ एक बार फिर गरमा गया है, लेकिन इस बार बहस सिर्फ आरक्षण नीति पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन की ‘अनुमति’ में कथित भेदभाव को लेकर छिड़ गई है। आरक्षण व्यवस्था में सुधार और UGC नियमों के विरोध में जुटे राष्ट्रीय समानता मंच/RHA के प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

हंगामा, हिरासत और पक्षपात के आरोप

धरने के दूसरे दिन जब प्रदर्शनकारी जुटने लगे, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर गाड़ियों में भर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें न तो टेंट लगाने की अनुमति दी गई और न ही मंच बनाने की।

* ​परमिशन पर विवाद: प्रदर्शनकारियों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जहां सीजेपी (CJP) समर्थकों को कथित तौर पर एयरपोर्ट पर ही परमिशन लेटर मिल जाता है, वहीं महीनों से अनुमति का इंतजार कर रहे सामान्य वर्ग के युवाओं को सड़क से जबरन उठा लिया जाता है।

* ​’जाति देखकर तय हो रहा विरोध का हक?’ जमीन पर उतरे युवाओं का आरोप है कि क्या अब लोकतंत्र में धरने की अनुमति भी जाति और वोटबैंक देखकर दी जाएगी?

‘प्रतिभा का दमन करके कैसे बनेगा विकसित भारत?’

प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं ने नीतिगत मुद्दों पर तीखे सवाल खड़े कि’…

* ​आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि गरीबी किसी जाति या धर्म को देखकर नहीं आती। वास्तविक जरूरतमंदों और गांव के गरीब छात्रों को मदद मिले ताकि वे डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें।

* ​योग्यता और गुणवत्ता पर जोर: एक प्रदर्शनकारी का कहना था, “हम विकसित भारत का सपना देख रहे हैं, लेकिन अगर कम अंक वालों को योग्यता की अनदेखी कर आगे बढ़ाया जाएगा, तो देश का भविष्य कैसे संवरेगा?”

* ​सुधार में देरी पर नाराजगी: वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण प्रणाली में समीक्षा और सुधार की मांग बहुत पहले पूरी होनी चाहिए थी, जिसे लगातार राजनीतिक लाभ के लिए टाला गया।

​जंतर-मंतर पर पुलिसिया कार्रवाई के बीच यह सवाल गूंज रहा है—क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की आवाज उठाने का अधिकार भी अब ‘किस वर्ग से हो’ के आधार पर तय होगा?

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