* हेमंत सोरेन सरकार पर पर चला सुप्रीम कोर्ट का चाबुक…
* सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई, केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस
JPSC Scam : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले ने अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर दस्तक दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या शीर्ष अदालत के किसी पूर्व न्यायाधीश से निष्पक्ष जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और JPSC समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
पीठ ने की मामले की सुनवाई
यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने दिया। यह जनहित याचिका (PIL) कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है।
याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु
* परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल: याचिका में विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (JPSC) प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025 की निष्पक्षता, शुचिता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है।
* पैसे के लेन-देन और अयोग्य अभ्यर्थियों के चयन का आरोप: वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा और अधिवक्ता सत्यम राजपूत ने पीठ के समक्ष दलील दी कि राज्य में विभिन्न नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुआ है। कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया और उन्हें सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया।
* व्यापक स्तर पर धांधली का दावा: याचिका में स्पष्ट किया गया कि गड़बड़ी का दायरा केवल एक या दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित सिंडिकेट की तरह फैला हुआ है।
* स्वतंत्र जांच एजेंसी की अनिवार्यता: याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार इस मामले की CBI जांच कराने की इच्छुक नहीं दिख रही है। अनियमितताओं की व्यापकता और गंभीरता को देखते हुए किसी विभागीय या राज्य स्तरीय एजेंसी की जांच नाकाफी होगी, इसलिए केंद्रीय एजेंसी द्वारा स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।
प्रतिवादियों से जवाब का इंतजार
याचिका में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC, JSSC, CBI और CID को पक्षकार (प्रतिवादी) बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सभी संबंधित पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करना होगा, जिस पर छात्र-अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं।
