Trump : फ्रांस के एवियान में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुचर्चित मुलाकात के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) न होने को लेकर अब स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के इस दावे पर कि ‘भारत ने मीडिया वार्ता से बचने का विशेष अनुरोध किया था’, भारतीय कूटनीतिक हलकों ने दो टूक जवाब देते हुए इसे ‘आधा सच’ करार दिया है। भारत का यह कदम किसी झिझक का नहीं, बल्कि ट्रंप के अनियंत्रित और गैर-पारंपरिक व्यवहार के खिलाफ एक नपी-तुली रणनीतिक ढाल था।
कूटनीतिक शिष्टाचार बनाम ट्रंप का अप्रत्याशित रवैया
शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, किसी भी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता से पहले मीडिया व्यवस्था तय करना एक मानक प्रोटोकॉल है। ट्रंप का ट्रैक रिकॉर्ड गवाह रहा है कि वे सार्वजनिक मंचों पर स्थापित कूटनीतिक मर्यादाओं को दरकिनार कर देते हैं…
* वैश्विक नेताओं की असहजता: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ ट्रंप के संवादों ने दिखाया है कि वे संयुक्त मंचों का उपयोग एकतरफा बयानों और सहयोगियों को घेरने के लिए करते हैं।
* भारत का सतर्क रुख: नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी संयुक्त वार्ता के दौरान अनावश्यक कूटनीतिक विवादों को हवा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए केवल द्विपक्षीय बातचीत पर ध्यान केंद्रित रखा गया, न कि मीडिया के सामने हंगामेदार सवालों पर।
पुराने जख्म और कूटनीतिक चालबाजियों की पृष्ठभूमि
भारत के इस सख्त और सधे हुए रुख के पीछे कई ठोस कारपृष्ठभूमि…
* सीजफायर और मध्यस्थता के झूठे दावे: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत-पाक तनाव के बीच ट्रंप द्वारा एकतरफा युद्धविराम की घोषणा करना और मध्यस्थता का झूठा श्रेय लेने की कोशिश करना भारत को रास नहीं आया था। भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि यह फैसला द्विपक्षीय था, न कि किसी तीसरे पक्ष के दबाव में।
* व्हाइट हाउस की रणनीति को झटका: व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को एक साथ बैठाने की अवांछित कोशिशों को भी भारत ने समय रहते भांप लिया था और अमेरिकी यात्रा के न्योते को स्वीकार न करके इस योजना को विफल किया था।
* टैरिफ और आर्थिक बयानबाजी: भारत पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकियां और भारतीय अर्थव्यवस्था पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों ने पहले ही कूटनीतिक माहौल में अविश्वास पैदा कर दिया था।
विवादों से परे, रणनीतिक हितों पर फोकस
हंगामेदार मीडिया सत्र से बचते हुए भारत ने बातचीत को पूरी तरह ठोस परिणामों पर केंद्रित रखा….
* COMPACT पहल की समीक्षा: दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाया।
* व्यापार और समुद्री सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन स्वतंत्रता, पश्चिम एशिया में स्थिरता और अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द संतुलित रूप से लागू करने पर चर्चा हुई।
भारत ने यह साफ संदेश दे दिया है कि शिखर सम्मेलनों में मीडिया टॉक एक परंपरा हो सकती है, कोई बाध्यता नहीं। जब बात राष्ट्रीय गरिमा और स्पष्ट कूटनीति की हो, तो नई दिल्ली किसी के व्यक्तिगत राजनीतिक ड्रामे का हिस्सा बनने के बजाय ठोस रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देती है।
