Jharkhand : झारखंड हाई कोर्ट ने 26 साल पुराने एक आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए निचली अदालत द्वारा तय की गई रेप के प्रयास (Attempt to Rape) की धारा को हटा दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आधी रात को किसी महिला के घर में जबरन घुसना और कपड़े खींचना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने (Outraging Modesty) का मामला है, न कि रेप के प्रयास का।
फैसले के मुख्य बिंदु
* कानूनी व्याख्या: जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी कृत्य को ‘रेप का प्रयास’ ठहराने के लिए एक ऐसा प्रत्यक्ष और विशिष्ट कदम (Proximate Act) साबित होना ज़रूरी है, जो सीधे तौर पर रेप को अंजाम देने की हद तक जाता हो। महज़ आगे बढ़ने का संकेत देने वाला कृत्य इसके दायरे में नहीं आता।
* धारा में बदलाव: अदालत ने मामले को रेप के प्रयास से बदलकर आईपीसी की धारा 354 (महिला के शील को ठेस पहुंचाना एवं आपराधिक बल का प्रयोग) में तब्दील कर दिया।
* सज़ा में कटौती व रिहाई: निचली अदालत द्वारा दी गई 4 साल की जेल की सज़ा को घटाकर 8 महीने कर दिया गया। चूंकि अभियुक्त ट्रायल के दौरान पहले ही 8 महीने की जेल काट चुका था, इसलिए उसे अतिरिक्त जेल भेजे बिना मामला समाप्त कर दिया गया।
घटनाक्रम की टाइमलाइन
* 27 दिसंबर 1999: पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया थाने में महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि एक व्यक्ति आधी रात को जबरन उसके घर में घुसा और कपड़े खींचने की कोशिश की। पुलिस ने रेप के प्रयास की धारा में चार्जशीट दाखिल की।
* 25 जुलाई 2006: घाटशिला सेशन कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए 4 साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई।
* हाई कोर्ट में अपील: सज़ा के खिलाफ अभियुक्त ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया, जहां 26 साल बाद निचली अदालत के फैसले को संशोधित करते हुए यह अंतिम निर्णय दिया गया
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