Red Fort Blast : राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए दहला देने वाले विस्फोट के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक ऐसी चार्जशीट दाखिल की है, जिसके खुलासे रोंगटे खड़े कर देते हैं। 13 आरोपियों के नाम वाली यह चार्जशीट सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि किसी हाई-वोल्टेज थ्रिलर फिल्म की पटकत लगती है, जिसमें चैटजीपीटी से लेकर ‘शैतान की मां’ कहे जाने वाले खतरनाक विस्फोटक तक की कहानी दर्ज है।
चैटजीपीटी, रॉकेट साइंस और खौफनाक प्लानिंग
जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल के एक आरोपी जसीर बिलाल वानी ने सिर्फ पारंपरिक तरीकों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उसने इंटरनेट, यूट्यूब और यहां तक कि चैटजीपीटी (ChatGPT) की मदद से रॉकेट बनाने के तरीके खंगाले थे। NIA की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने रॉकेट तैयार भी कर लिया था, गनीमत यह रही कि उसकी टेस्टिंग ऐन वक्त पर टाल दी गई। मास्टरमाइंड उमर नबी ने उसे दो ड्रोन भी मुहैया कराए थे, जिनका इस्तेमाल किसी बड़ी साजिश के लिए होना था।
‘शैतान की मां’ यानी TATP का काला सच
इस पूरी साजिश का सबसे खतरनाक किरदार वह विस्फोटक रहा, जिसे चार्जशीट में TATP (Tri-Acetone Tri-Peroxide) बताया गया है।
* दो बड़ी लैब की मुहर: चंडीगढ़ की CFSL और गांधीनगर की NFSU—दोनों प्रयोगशालाओं ने पुष्टि की है कि धमाके की जगह से मिले नमूनों में TATP, अमोनियम नाइट्रेट और पोटैशियम नाइट्रेट मौजूद थे।
* क्यों कहते हैं ‘शैतान की मां’? बेहद संवेदनशील होने के कारण TATP को दुनिया भर के बम-रोधी विशेषज्ञ ‘Mother of Satan’ कहते हैं। यह गर्मी, मामूली घर्षण या दबाव से ही फट जाता है। इसे एसीटोन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसी आम चीजों से आसानी से घर में ही तैयार किया जा सकता है।
सिग्नल ऐप और ‘रौलदत्ता’ का कोड-नेम
जांच एजेंसी के अनुसार, ये आतंकी पुलिस और एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए आम मैसेजिंग ऐप्स की बजाय Signal ऐप का इस्तेमाल करते थे। हर आरोपी का एक कोड-नेम था। उदाहरण के लिए, आरोपी A-7 का सिग्नल पर कोड-नेम Rauldatta था, जिसके जरिए वे पूरी गोपनीयता से अपनी साजिशों को अंजाम दे रहे थे।
अल-कायदा की ‘लोन मुजाहिद’ पॉकेट बुक
आरोपियों के पास से ‘Lone Mujahid Pocket Book’ और ‘How to Become an Assassin’ जैसे दस्तावेज बरामद हुए हैं। NIA का दावा है कि अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (AQAP) की ‘इन्सपायर मैगजीन’ से जुड़े ये मैनुअल अकेले हमला करने वाले (Lone Wolf) आतंकियों को तैयार करने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड का काम करते थे। इसमें निगरानी से बचने, छिपकर वार करने और बम बनाने के तरीके सिखाए गए थे।
नौगाम थाने का रहस्यमयी धमाका
चार्जशीट में 14 नवंबर 2025 की उस खौफनाक घटना का भी जिक्र है, जब फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास से बरामद विस्फोटक सामग्री को जांच के लिए नौगाम पुलिस स्टेशन लाया गया था। थाने के परिसर में अचानक हुए उस भीषण धमाके में 9 पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी और 29 लोग घायल हुए थे, जो इस पूरे नेटवर्क की तबाही की क्षमता को बयां करता है।
मास्टरमाइंड डॉक्टर उमर नबी खुद हुंडई i20 कार (VBIED) के भीतर मौजूद था और उसी ने IED का कमांड स्विच दबाया था। हालांकि, 10 नवंबर के उसी धमाके में उसकी मौत हो जाने के कारण कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके खिलाफ आरोप तो समाप्त मान लिए गए हैं, लेकिन NIA की इस चार्जशीट ने इस बात से पर्दा उठा दिया है कि किस तरह तकनीक और कट्टरता का यह जहरीला कॉकटेल देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया था।
