UNGA : ​UN में एस. जयशंकर का कड़ा रुख… आतंकवाद पर पाकिस्तान को बेनकाब, कहा- ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति से कोई समझौता नहीं

Bindash Bol

UNGA : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत का पक्ष मजबूती से रखते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बिना नाम लिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि आतंकवाद को सामान्य गतिविधि बताने या इसके परिणामों से बचने के तर्क अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु और मुख्य बातें…

* ​आतंकवाद पर ज़ीरो-टॉलरेंस: विदेश मंत्री ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। भारत अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करना जारी रखेगा।

* ​पाकिस्तान पर तीखा प्रहार: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के UN में दिए गए भाषण का जिक्र किए बिना, जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। आतंकवाद और सद्भावना एक साथ नहीं चल सकते।

* ​युद्ध और वैश्विक शांति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को साझा करते हुए उन्होंने बल दिया कि अब दुनिया को संघर्षों को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यूएन की स्थापना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए हुई थी, जिसे बनाए रखना सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

* ​ग्लोबल साउथ और ‘4F’ संकट: विकासशील देशों के सामने उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने भोजन (Food), ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertilizer) और वित्त (Financing) यानी ‘4F’ संकट को ग्लोबल साउथ के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

* ​पश्चिम एशिया पर भारत का रुख: पश्चिम एशिया में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए उन्होंने ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-राष्ट्र समाधान) की वकालत की।

UN में पाकिस्तान का पक्ष

​इससे पहले, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में 2025 के सैन्य संघर्ष का हवाला दिया और तनाव कम करने में अमेरिकी भूमिका की सराहना की। शरीफ ने अपने 23 मिनट के भाषण में कश्मीर मुद्दे को भी उठाया और क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए इसके समाधान पर जोर दिया।
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संयुक्त राष्ट्र के इस वैश्विक मंच पर एस. जयशंकर का संबोधन आतंकवाद के प्रति भारत के सख्त रुख, वैश्विक शांति की अनिवार्यता और ग्लोबल साउथ के अधिकारों पर पूरी तरह केंद्रित रहा।
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