Asian Games 2026 :भारत के युवा मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 80 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया है। फाइनल में अंकुश ने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराकर भारत के खाते में एक और गोल्ड जोड़ा। यह एशियन गेम्स में अंकुश का पहला पदक है और पुरुष मुक्केबाजी में भारत का इस संस्करण का तीसरा स्वर्ण पदक है।
कौन हैं अंकुश पंघाल?
* 13 अगस्त 2005 को हरियाणा के हिसार के बेरिया में जन्मे अंकुश पंघाल अभी 21 साल के हैं।
* वह पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में मुक्केबाजी करते हैं।
* कम उम्र में ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है।
* अंकुश की खासियत उनकी तेज मूवमेंट, काउंटर अटैक और रिंग में परिस्थितियों के मुताबिक रणनीति बदलने की क्षमता रही है।
* उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में रजत पदक, 2026 में चेकिया के उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री में स्वर्ण, इसके बाद ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 80 किग्रा वर्ग का स्वर्ण और अब एशियन गेम्स का गोल्ड शामिल है।
2025 में पहली बड़ी पहचान
अंकुश ने 80 किग्रा वर्ग में 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में हिस्सा लिया था। नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता। फाइनल में उन्हें इंग्लैंड के ओलादेमिजी शिट्टू से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी क्षमता की झलक दे दी। इसके बाद अंकुश ने 2026 में अपने खेल में और निखार किया। जुलाई में उन्होंने चेकिया के उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री में 80 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भी किया कमाल
अंकुश के करियर में सबसे बड़ा मोड़ 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स रहा। ग्लासगो में उन्होंने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड के डाइमेजी शिट्टू से हुआ। फाइनल की शुरुआत अंकुश के लिए अच्छी नहीं रही। वह पहले राउंड में 0-5 से पिछड़ गए, लेकिन उन्होंने मुकाबले में वापसी करते हुए अगले दोनों राउंड अपने नाम किए और 4-1 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ वह ग्लासगो में 80 किग्रा वर्ग के कॉमनवेल्थ चैंपियन बने। यही प्रदर्शन उनके एशियन गेम्स अभियान की मजबूत नींव बना।
फाइनल में दक्षिण कोरियाई मुक्केबाज को हराया
स्वर्ण पदक के मुकाबले में अंकुश के सामने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग थे। अंकुश ने पूरे मुकाबले में संयम के साथ बॉक्सिंग की और काउंटर पंचिंग, फुटवर्क तथा मूवमेंट के जरिए मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। अंत में उन्होंने 4-0 के फैसले से किम मिनसियोंग को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
