Bankipur By election : बांकीपुर उपचुनाव में BJP उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने क्यों छोड़ा मैदान?

Bindash Bol

* क्या अभिषेक पर भारी पड़ा चारा घोटाले का कनेक्शन?

Bankipur By election :बीजेपी ने बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार ही बदल दिया है. पहले अभिषेक कुमार बंटी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था. अभिषेक ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था. नामांकन के बाद मुख्यमंत्री समेत बिहार बीजेपी के तमाम बड़े नेता एक मंच पर जुटकर होकर अभिषेक को माला भी पहना चुके थे. मगर, नामांकन के 24 घंटे बाद ही अभिषेक ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया है. अब सवाल यह उठता है क्या वाकई अभिषेक कुमार ने पारिवारिक कारणों से नाम वापस लिया है या फिर बीजेपी ने उन्हें नाम वापस लेने को मजबूर किया है?

अभिषेक कुमार का नामांकन वापस होने के पीछे की जो अंदरूनी खबर है, वह ये है कि अभिषेक के माता-पिता चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता हैं. इसके पूरे कागजात आरजेडी खेमे से होते हुए प्रशांत किशोर के पास भी मौजूद हैं. प्रशांत किशोर इसका खुलासा नामांकन की तारीख समाप्त होने के बाद करने वाले थे. इसकी भनक बीजेपी खेमे को भी लग गई.

अभिषेक की उम्मीदवारी से खुश नहीं थी बिहार बीजेपी
बिहार बीजेपी पहले से ही अभिषेक कुमार की उम्मीदवारी से खुश नहीं थी. बिहार बीजेपी कोर कमेटी की पिछले दिनों बैठक हुई थी. उसमें चयनित जो तीन नाम आलाकमान को भेजे गए थे, उनको दरकिनार करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पसंद और करीबी अभिषेक को उम्मीदवार बना दिया गया था. अब बिहार बीजेपी ने अभिषेक के पूरे कागजात दिल्ली पहुंचा दिए.

बीजेपी आलाकमान को दी गई ये जानकारी
इसके बाद मजबूरन बीजेपी को अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा. बीजेपी आलाकमान को यह बताया गया कि चारा घोटाले के आरोपी के परिवार से जुड़े बीजेपी उम्मीदवार का मुद्दा बांकीपुर में महंगा पड़ सकता है, क्योंकि यह उपचुनाव राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट पर हो रहा है. लिहाजा यह बीजेपी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की साख का सवाल है.

चारा घोटाले से कनेक्शन

चारा घोटाले के तीन मामलों में इस नाम के लोगों को सजा या जुर्माना हुआ है.

डोरंडा कोषागार मामले में पिता को सजा

सीबीआई कोर्ट ने साल 2022 में डोरंडा कोषागार, रांची से 1990-91 से 1995-96 के बीच 182.82 करोड़ रुपये के गबन करने के मामले में लालू यादव समेत 75 लोगों को दोषी माना था. उसमें रविन्द्र प्रसाद का नाम भी था. उनका नाम सीबीआई की प्रेस रिलीज में मगध केमिकल कॉर्पोरेशन, पटना के तौर पर दर्ज है. उनको इस मामले में 3 साल की सजा सुनाई गई थी.

साहेबगंज कोषागार मामले में माता-पिता दोनों को सजा

सीबीआई की एक स्पेशल कोर्ट ने साल 2012 में साहेबगंज कोषागार से साल 1991 से 1996 के बीच फर्जी तरीके से 67 लाख, 49 हजार 989 रुपये की निकासी के मामले में 26 लोगों को दोषी ठहराया. इस मामलें में आरोपियों को पांच साल से लेकर एक साल तक के कठोर कारावास और छह लाख रुपये तक का जुर्माना की सजा मिली.

चाइबासा डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरी ऑफिस मामले में भी सजा

सीबीआई ने 28 अगस्त 1996 को पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक केस दर्ज किया. मामला चाईबासा डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरी ऑफिस और एनिमल हसबैंड्री ऑफिस से फर्जी तरीके से लगभग 37 करोड़ 62 लाख रुपये की निकासी का था. ये निकासी साल 1992-93 के बीच फर्जी अलॉटमेंट लेटर, सप्लाई ऑर्डर और फर्जी बिल के आधार पर किए गए. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने साल 2018 में इस मामले में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत 50 लोगों को दोषी पाया और उनको सजा सुनाया. इस मामले में चंचला सिन्हा को तीन साल की सजा सुनाई गई और 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.

बीजेपी और जन सुराज से जुड़े लोगों ने बताया कि जिन चंचला सिन्हा और रविन्द्र प्रसाद को चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में सजा मिली है, वे अभिषेक बंटी के माता-पिता ही है.

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