Bengal : “गांधी नहीं, नेताजी की भाषा में मिलेगा जवाब…” टुकड़े-टुकड़े गैंग पर सुवेंदु अधिकारी की दो टूक चेतावनी

Bindash Bol

Bengal : पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर अपने तेवरों की वजह से सुलग उठी है। राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी और अन्य शिक्षण संस्थानों में देशविरोधी नारों पर कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्र-विरोधी ताकतों को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर परिसरों में ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे गूंजेंगे, तो सरकार महात्मा गांधी के अहिंसक मार्ग के बजाय नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंदाज में सख्ती से निपटेगी।

भगवा के अपमान पर फूटा गुस्सा

कोलकाता पुलिस कमिश्नर को दिए गए निर्देशों का जिक्र करते हुए सीएम अधिकारी ने कहा कि बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बयानों के बाद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान धर्मगुरु की तस्वीरें जलाने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल भगवा की धरती है और यहां आस्था या केसरिया रंग का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘दुर्गा पूजा’ लिखे बिना कम्युनिस्टों को स्टॉल की इजाजत नहीं

त्योहारों के मौसम में सियासत गर्माते हुए मुख्यमंत्री ने कम्युनिस्ट संगठनों पर भी निशाना साधा। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर वामपंथी संगठन अपने स्टॉल पर स्पष्ट रूप से ‘दुर्गा पूजा’ नहीं लिखते हैं, तो उन्हें राज्य में कहीं भी स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का रोडमैप

विधानसभा में पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रशासन एवं विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘एक राज्य, एक शिक्षा नीति’ की वकालत की। इस नए बिल के जरिए सरकार का मकसद उच्च शिक्षा में बड़ा सुधार लाना है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं…

* ​शिक्षकों का ट्रांसफर: कोलकाता और बड़े शहरों के पुराने, प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में लंबे समय से जमे प्रोफेसरों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अब ग्रामीण और दूर-दराज के नए विश्वविद्यालयों में भेजा जा सकेगा, जिससे मानव संसाधनों का संतुलित विकास हो सके।

* ​स्वायत्तता और जवाबदेही: सरकार का तर्क है कि यह नया कानून संस्थानों की स्वायत्तता और प्रशासन के प्रति उनकी जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करेगा।

* ​आलिया यूनिवर्सिटी पर शिकंजा: अब तक अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाली आलिया यूनिवर्सिटी को उच्च शिक्षा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया जाएगा।

* ​भारी भरकम ग्रांट और जांच पैनल: जादवपुर यूनिवर्सिटी को 1,300 करोड़ रुपये की ग्रांट दिए जाने का ऐलान किया गया है, साथ ही यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी गोपाल सेन की 1970 में हुई हत्या की नए सिरे से जांच के लिए पैनल बनाए जाने की बात कही गई है।

​सुवेंदु अधिकारी के इन तेवरों और नए शिक्षा विधेयकों से साफ है कि बंगाल की सियासत में आने वाले दिनों में शैक्षणिक संस्थानों और वैचारिक मोर्चों परवान चढ़ता संघर्ष और गहराने वाला है।

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