Bullet Trai : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का धमाकेदार सफर! 249 की रफ्तार, 1114 यात्री और फ्री वाई-फाई

Bindash Bol

Bullet Trai : भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन ‘भारत 28’, BEML बना रहा है प्रोटोटाइप, सेफ्टी टेस्टिंग के अहम पड़ाव पर

Bullet Trai : 8 कोच में 557 यात्री, 280 Km/h टेस्ट स्पीड, बड़ी खिड़कियां और दिव्यांगों के लिए खास सुविधा

Bullet Trai : अगस्त 2027 से दौड़ेगी देसी बुलेट ट्रेन, ‘स्क्वीज टेस्ट’ हुआ पूरा

Bullet Trai : भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन अब हकीकत के करीब पहुंच रही है. बेंगलुरु में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) की फैसिलिटी में इसके प्रोटोटाइप का निर्माण चल रहा है, जो अब सुरक्षा-परीक्षण (सेफ्टी-टेस्टिंग) के एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है. ‘भारत 28’ (B-28) नाम की यह हाई-स्पीड ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए तैयार की जा रही है. इसमें आठ कोच होंगे और यह 557 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी.

इस ट्रेन को 280 किमी प्रति घंटे की अधिकतम टेस्ट स्पीड तक पहुंचने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि इसकी ऑपरेशनल स्पीड (परिचालन गति) 249 किमी प्रति घंटा होगी. इसमें सात स्टैंडर्ड-क्लास कोच और एक एग्जीक्यूटिव-क्लास कोच होगा. साथ ही, इसमें वाई-फाई कनेक्टिविटी, चार्जिंग पॉइंट, बड़ी खिड़कियां, सुलभ शौचालय और कम गतिशीलता (reduced mobility) वाले यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं होंगी. रेलवे का लक्ष्य अगस्त 2027 से इसका कमर्शियल परिचालन शुरू करने का है.

‘स्क्वीज टेस्ट’ पूरा होने वाला है, इसके बाद क्या होगा?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर को बेंगलुरु में BEML की आदित्य मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का दौरा किया, ताकि भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य का जायजा लिया जा सके. इस समय चल रहे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है – पहले कोच की इंटीग्रेटेड कार बॉडी का ‘स्क्वीज़ टेस्ट’. इस टेस्ट के जरिए यह जांचा जाता है कि क्या ट्रेन का ढांचा बिना किसी बड़े नुकसान या संरचनात्मक विफलता के, बाहरी भारी दबाव और ताकतों को झेल सकता है.

वैष्णव ने बताया कि स्क्वीज टेस्ट अपने अंतिम फेज में है और अगले हफ्ते तक पूरा हो जाएगा. इसके बाद, इंजीनियर इसमें प्रोपल्शन सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाएंगे. फिर कोच का ‘क्लाइमेटिक टेस्टिंग’ (जलवायु परीक्षण) किया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि ट्रेन अलग-अलग मौसमों में कैसे काम करती है – जैसे कि 50 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान, अत्यधिक ठंड, धूल भरा माहौल और भारी बारिश. BEML द्वारा पहली दो स्वदेशी बुलेट ट्रेनें बनाई जा रही हैं, जिनमें से प्रत्येक में आठ कोच होंगे.

8 कोच, 557 यात्री और 249 किमी प्रति घंटे की ऑपरेशनल स्पीड

‘भारत 28’ ट्रेनसेट लगभग 202 मीटर लंबा होगा और इसमें आठ कोच होंगे, जिनमें चार मोटर कारें और चार ट्रेलर कारें शामिल हैं.

इसकी बैठने की व्यवस्था (सीटिंग अरेंजमेंट) में शामिल होंगे…

* सात स्टैंडर्ड-क्लास कोच, जिनमें 3×2 की सीटिंग व्यवस्था होगी. 2×2 सीटिंग वाली एक एग्जीक्यूटिव-क्लास कोच. कुल यात्री क्षमता 557 है, जिसमें कम चलने-फिरने की क्षमता वाले दो यात्रियों के लिए विशेष जगह भी शामिल है.

* ट्रेन के दोनों सिरों पर ड्राइवर कैब होंगे, जिनमें एक इंटेलिजेंट ऑनबोर्ड कंट्रोल सिस्टम लगा होगा. यह सिस्टम ड्राइवर को फैसले लेने और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर के साथ तालमेल बिठाने में मदद करेगा.

* इसके अलावा, आठ-आठ कोच वाली दो ट्रेनों को जोड़कर 16 कोच की एक ट्रेन बनाने की सुविधा भी दी गई है. इससे जरूरत पड़ने पर रेलवे यात्रियों की क्षमता बढ़ा सकेगा.

बड़ी खिड़कियां, वाई-फाई और चार्जिंग पॉइंट: यात्रियों को क्या-क्या मिलेगा

* ट्रेन के इंटीरियर को भारतीय यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है. इसमें आरामदायक सीटें, पैरों के लिए काफी जगह (लेगरूम) और हर पंक्ति के पास बड़ी खिड़कियां दी गई हैं.

* यात्रियों को अंदर LED लाइटिंग, ऊपर सामान रखने के लिए रैक और बड़े सामान के लिए फर्श पर अलग से स्टोरेज स्टैंड मिलेंगे. हर यात्री के लिए अलग पावर आउटलेट होंगे, जिससे वे सफर के दौरान अपने लैपटॉप और मोबाइल फोन चार्ज कर सकेंगे.

* वाई-फाई बेस्ड इंफोटेनमेंट सिस्टम के जरिए यात्री पहले से लोड किए गए मनोरंजन का आनंद ले सकेंगे. कोच के अंदर लगे LCD डिस्प्ले पर यात्रियों को अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी मिलेगी. ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए यात्रियों को पूरे सफर के दौरान अपडेट मिलता रहेगा.

* यात्री केबिन और कोच के बीच के हिस्से (वेस्टिब्यूल) में ‘इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट’ लगाई जाएंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री ट्रेन के स्टाफ से बात कर सकें.

* कोच में बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट होंगे. साथ ही, पूरे साल आरामदायक तापमान और नमी बनाए रखने के लिए इसमें हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर-कंडीशनिंग (HVAC) सिस्टम लगा होगा.’भारत 28′ ट्रेन में दिव्यांगों और चलने-फिरने में कठिनाई महसूस करने वाले यात्रियों के लिए कई खास सुविधाएं होंगी.

* ट्रेन का फर्श प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के बराबर होगा, जिससे यात्री आसानी से अंदर आ-जा सकेंगे. दरवाजों में ऐसे पायदान (स्टेप्स) होंगे जो जरूरत पड़ने पर बाहर निकल आएंगे, जिससे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच का खाली गैप कम हो जाएगा.

* इसमें खास सीटें, व्हीलचेयर के लिए उपयुक्त दरवाजे और दिव्यांगों के अनुकूल टॉयलेट भी होंगे.दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए, ट्रेन में ब्रेल लिपि वाले सूचना बोर्ड (साइन) लगे होंगे.

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और एयरोडायनामिक डिज़ाइन

* यह ट्रेन 25 kV AC ओवरहेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम से चलेगी. इसमें ‘रीजेनरेटिव ब्रेकिंग’ तकनीक का इस्तेमाल होगा. जब ट्रेन की गति कम होती है, तो यह तकनीक उससे पैदा होने वाली ऊर्जा को वापस इलेक्ट्रिकल ग्रिड में भेज देती है. इससे ऊर्जा की खपत कम करने में मदद मिलती है.

* ट्रेन की बॉडी और आगे के हिस्से (नोज़) को कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से ‘एयरोडायनामिक’ डिजाइन दिया गया है, ताकि हवा का प्रतिरोध और हलचल (टर्बुलेंस) कम हो सके. इस डिजाइन का मकसद यह भी है कि जब ट्रेन सुरंगों से गुजरे, तो दबाव की लहरें (प्रेशर वेव्स) और शोर कम से कम हो.

* ट्रेन की बॉडी और फर्श में ‘साउंड इंसुलेशन’ (आवाज रोकने वाली परत) और शोर कम करने वाली कोटिंग (नॉइज़-डैम्पिंग कोटिंग) लगाई गई है, जिससे कोच के अंदर शोर काफी कम रहेगा.

भारत की पहली बुलेट ट्रेन कब से चलना शुरू होगी?

रेलवे की योजना है कि 2027-28 वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में, मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के लगभग 100 किलोमीटर लंबे सूरत-वापी सेक्शन पर स्वदेशी ट्रेन का टेस्ट रन शुरू किया जाए. अगस्त 2027 से इसके कमर्शियल परिचालन (व्यावसायिक संचालन) का लक्ष्य रखा गया है. पहली दो प्रोटोटाइप ट्रेनें BEML में बनाई जा रही हैं. 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है. यह परियोजना अपनी खुद की हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक विकसित करने की भारत की कोशिश को दर्शाती है. B-28 को जापानी शिंकांसेन तकनीक पर निर्भर रहे बिना विकसित किया जा रहा है.

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