CambrianPublicSchoolRanchi : कैंब्रियन पब्लिक स्कूल काठीटांड में माँ महालक्ष्मी एवं भगवान धन्वन्तरि की अराधनना के साथ दीपोत्सव का भव्य आयोजन

Bindash Bol

Cambrian Public School Ranchi : कैम्ब्रियन पब्लिक स्कूल, काठीटांड (रांची) में धन्वन्तरि जयंती, दीपोत्सव और लोक आस्था के महापर्व छठ के पावन अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माँ महालक्ष्मी और भगवान धन्वन्तरि की आराधना के साथ विद्यालय परिसर भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आया।

 सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां

प्रातःकालीन सभा का शुभारंभ गरिमामयी प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी कला से सभी का मन मोह लिया…..
श्री राम की वापसी: नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने “राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे” गीत पर प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन की मनोहारी झांकी प्रस्तुत कर समां बांध दिया।


माँ काली की झांकी: कक्षा पंचम के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत माँ काली की नयनाभिराम झांकी ने कार्यक्रम को और अधिक अलौकिक एवं आनंददायक बना दिया।
भक्तिमय छठ गीत: कक्षा नौवीं और दसवीं के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक छठ गीत “उगऽ हे सुरुज देव होते भिनसहरा, अरघिया के बेरवा नु हो” की सुमधुर प्रस्तुति से पूरे वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया।

 अंतर्सदनीय रंगोली प्रतियोगिता के परिणाम

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विद्यालय के चारों सदनों के बीच एक आकर्षक अंतर्सदनीय रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट कला और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया…

स्थान          सदन (House)
प्रथम           क्षितिज सदन
द्वितीय         आरंभ सदन
तृतीय          उदय सदन
चतुर्थ           आरोह सदन

 प्राचार्यों के प्रेरणादायक विचार
विद्यालय के प्राचार्य श्री संजय मिश्रा ने इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने भारत को विविध पर्वों और त्योहारों का देश बताते हुए कहा कि हमारी महान सांस्कृतिक विरासत मानव जीवन को सुखमय और उत्सवमय बनाती है, जिस पर हम सभी को गर्व होना चाहिए।
उन्होंने भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वन्तरि के प्रसंग का स्मरण करते हुए बताया कि समुद्र मंथन के दौरान आज ही के दिन उनका प्राकट्य हुआ था। उन्होंने भगवान धन्वन्तरि को देवताओं का आरोग्यपति बताते हुए आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) को पुरुषार्थ—अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष—की प्राप्ति का श्रेष्ठ आधार करार दिया।
यह आयोजन विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा जागृत करने में पूरी तरह सफल रहा।

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