Delhi Protest : NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का गुस्सा सोमवार को राजधानी की सड़कों से निकलकर संसद के दरवाजे तक पहुंच गया। जंतर-मंतर से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन संसद मार्च में बदल गया, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह झड़प हुई। हालात ऐसे बने कि संसद परिसर की सुरक्षा बढ़ानी पड़ी और एहतियात के तौर पर प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए।
करीब एक महीने से जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन सोमवार को अपने सबसे बड़े प्रदर्शन में बदल गया। हजारों छात्र संसद की ओर कूच कर गए और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका सवाल सिर्फ एक है—NEET पेपर लीक का जिम्मेदार कौन और जवाबदेही कब तय होगी?
बैरिकेड, आंसू गैस और लाठीचार्ज
दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तर की बैरिकेडिंग की। हालात बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई जगह लाठीचार्ज भी किया गया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास हुई झड़प में दिल्ली पुलिस का एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गया।
इसी दौरान संसद का मानसून सत्र भी चल रहा था। सुरक्षा एजेंसियों ने संसद परिसर में हाई अलर्ट घोषित किया और एहतियातन प्रवेश द्वार बंद कर दिए। क्विक रिएक्शन टीम (QRT) समेत अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया।
सरकार से बातचीत, नड्डा से मिले CJP प्रतिनिधि
एक ओर सड़क पर प्रदर्शन जारी था, दूसरी ओर सरकार और CJP के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ। सौरव दास और आशुतोष रांका के नेतृत्व में CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और धरना समाप्त करने की अपील की गई। वहीं CJP ने कहा कि फिलहाल उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं…
* सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा किया जाए।
* शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
* जिन NEET अभ्यर्थियों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
अभिजीत दीपके ने खत्म किया अनशन, वांगचुक डटे रहे
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। संगठन ने दावा किया कि उन्हें हिरासत में लिया गया, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस दावे से इनकार किया। दूसरी ओर अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने पत्र जारी कर साफ कहा कि जब तक युवाओं को सांसदों से मिलने का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
प्रदर्शन में राजनीतिक दल भी शामिल
दिनभर चले आंदोलन को कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला। आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया और आतिशी, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव, आरजेडी के मनोज झा समेत कई नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सोशल मीडिया के जरिए समर्थन जताया।
उधर गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच भी लंबी बैठक हुई, हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई।
संसद में भी गूंजा पेपर लीक का मुद्दा
सड़क पर प्रदर्शन के साथ-साथ संसद के भीतर भी NEET पेपर लीक को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष की मांग थी कि सरकार इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराए।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की आलोचना की। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “युवा विरोधी प्रधानमंत्री” बताया, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः दोनों सदनों की बैठक अगले दिन तक के लिए टाल दी गई।
दिल्ली से बाहर भी दिखा असर
आंदोलन का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के आजाद मैदान समेत देश के कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किया। इसी बीच जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
रात में फिर जंतर-मंतर पर लौटे प्रदर्शनकारी
दिनभर की कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर का धरनास्थल खाली कराया और मंच हटवा दिया। लेकिन देर रात अभिजीत दीपके के नेतृत्व में CJP समर्थक दोबारा जंतर-मंतर पहुंच गए और प्रदर्शन स्थल पर फिर से डेरा जमा लिया। इससे साफ संकेत मिला कि आंदोलन फिलहाल थमने वाला नहीं है।
अब सबकी निगाहें सरकार और आंदोलनकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल वही है—क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या यह टकराव और बड़ा रूप लेगा?