Dhanteras 2026: धनतेरस सिर्फ सोना-चांदी खरीदने और लक्ष्मी-कुबेर की पूजा का दिन नहीं है. इस दिन शाम ढलते ही घर के मुख्य द्वार के बाहर एक खास दीया जलाया जाता है — चौमुखी यम दीपक.
चार मुख वाला यह दीया सिर्फ रौशनी नहीं फैलाता, बल्कि परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाता है. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया गया यह दीपक यमराज को प्रसन्न करता है और घर में दीर्घायु, शांति और सुरक्षा का वरदान लेकर आता है.
क्या आप जानते हैं कि इस दीपक को क्यों सिर्फ दक्षिण दिशा में रखा जाता है? प्रदोष काल में जलाने का सही समय क्या है? और चौमुखी दीया बनाने का क्या महत्व है?
धनतेरस 2026 (6 नवंबर) पर यम दीपदान की पूरी विधि, सही समय और दिशा जानने के लिए आगे पढ़ें — क्योंकि एक छोटी-सी लौ आपके परिवार की सुरक्षा का बड़ा कवच बन सकती है.
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस का पावन पर्व इस साल 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को पूरे देश में बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. इस खास दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी के पूजन के साथ ही यमराज के नाम से चौमुखी दीपक जलाने की बहुत पुरानी परंपरा चली आ रही है. शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाने वाला यह विशेष दीपक परिवार के सभी सदस्यों की सुरक्षा और आरोग्य के लिए बहुत आवश्यक माना जाता है. लेकिन इस परंपरा को पूरा करने के लिए सही समय, सही दिशा और नियमों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है ताकि इसका पूरा फल मिल सके. आइए जानते हैं कि इस पावन शाम को यम का दीपक किस प्रकार जलाना चाहिए.
धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
- धनतेरस पूजा तिथि: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक
- कुल अवधि: 01 घंटा 56 मिनट
- प्रदोष काल: शाम 05:32 बजे से 08:09 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक
यम का चौमुखी दीपक जलाने का धार्मिक महत्व और परंपरा
धनतेरस की शाम यमराज के नाम से चौमुखी दीपक जलाने के पीछे मुख्य उद्देश्य परिवार को अकाल मृत्यु के भय से मुक्त रखना और घर में शांति बनाए रखना होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस खास शाम को जब चार बत्तियों वाला चौमुखी दीपक जलाकर घर से बाहर रखा जाता है, तो यमराज देव प्रसन्न होते हैं और घर के सदस्यों पर आने वाले हर संकट को दूर कर देते हैं. इस पुराने नियम का पालन करने से पूरे परिवार के ऊपर एक रक्षा कवच बन जाता है जिससे कभी भी कोई अनहोनी नहीं होती. लोग सदियों से इस पावन परंपरा को निभाते आ रहे हैं ताकि उनके घर में खुशहाली और आरोग्य का वास बना रहे. यह छोटा सा कार्य परिवार के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाता है.
दीपक जलाने की सही दिशा समय और नियम
यम का चौमुखी दीपक जलाने के लिए सबसे उपयुक्त समय धनतेरस की शाम का प्रदोष काल माना जाता है. इस दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके रखना बहुत शुभ माना गया है, क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है. दीपक जलाने के लिए एक बड़ा पुराना दीया लें और उसमें चार बत्तियां लगाकर सरसों का तेल भरें. जब घर के सभी लोग अपने काम से निपट जाएं और शाम हो जाए, तब इसे घर से बाहर ले जाकर जलाएं. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दीपक जलाने के बाद उसे पीछे पलटकर कभी नहीं देखना चाहिए. सही दिशा और नियम से जलाया गया यह दीप सभी बाधाओं को समाप्त कर देता है.
यम दीपम के समय रखी जाने वाली सावधानियां और नियम
- विशेष ध्यान: यम दीपम की इस पावन प्रक्रिया को पूरा करते समय कुछ विशेष बातों का बहुत ध्यान रखना पड़ता है ताकि पूजन में कोई कमी न रहे.
- यमराज देव का स्मरण: दीपक जलाते समय मन में यमराज देव का ध्यान करें और अपने परिवार की लंबी आयु तथा सुरक्षा की प्रार्थना करें.
- दीपक का उचित स्थान: इस दीपक को जलाकर मुख्य द्वार के पास किसी साफ-सुथरे स्थान पर ही रखें जहां किसी का पैर न लगे.
- अगली सुबह की प्रक्रिया: जब दीपक पूरी तरह से शांत हो जाए, तो अगली सुबह उसे आदरपूर्वक उठाकर हटा दें
- सफलता और सुख: जब आप इन सभी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपका पूरा अनुष्ठान बहुत ही सफलता के साथ संपन्न होता है और घर में सुख बना रहता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.