Diwali 2026 : दीपों का महापर्व… देशभर में उल्लास, कहीं 30 लाख दीयों से जगमगाई अयोध्या तो कहीं हुई मां काली की आराधना!

Sushmita Mukherjee

Diwali 2026 : ​भारतवर्ष में उल्लास, उमंग और प्रकाश का महापर्व दिवाली हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शाम ढलते ही घरों, ऐतिहासिक मंदिरों और बाजारों की रौनक देखते ही बन रही है, जहां दीपों की जगमगाहट से हर कोना रोशन हो उठा है। पर्व की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या में आयोजित भव्य दीपोत्सव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा, जहां सरयू के घाटों पर 30 लाख दीये जलाए गए और आतिशबाजी का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
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भारत की विविधता में एकता: देश के 10 शहरों में दिवाली मनाने के 10 अनूठे और पारंपरिक रंग

​हमारे देश में दिवाली का पर्व केवल दीप प्रज्ज्वलन तक सीमित नहीं है, बल्कि हर शहर और राज्य में इसे अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और मान्यताओं के साथ बेहद खास अंदाज में मनाया जाता है….

1. अयोध्या (उत्तर प्रदेश) — दीपोत्सव का ऐतिहासिक दशक

​अयोध्या में वर्ष 2017 से शुरू हुआ दीपोत्सव अब एक ऐतिहासिक परंपरा बन चुका है। राम की पैड़ी और सरयू के घाटों को लाखों दीयों से सजाया जाता है। पिछले साल दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनने के बाद, इस वर्ष 30 लाख दीये जलाने का भव्य लक्ष्य पूरा कर नया कीर्तिमान रचा गया है।

2. कोलकाता (पश्चिम बंगाल) — मां लक्ष्मी की जगह मां महाकाली की विशेष पूजा

​बंगाल में दिवाली की रात मां लक्ष्मी के स्थान पर मां काली की आराधना की जाती है, जिसे ‘श्यामा पूजा’ या ‘दीपान्विता पूजा’ कहा जाता है। राजा कृष्णचंद्र ने इसे लोकप्रिय बनाया था। दक्षिणेश्वर काली मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं और कोलकाता के कलात्मक पंडाल सामाजिक-सांस्कृतिक थीम पर सजाए जाते हैं।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में दिवाली (कार्तिक अमावस्या की रात) पर मां लक्ष्मी के स्थान पर मां महाकाली (श्यामा मां) की विशेष पूजा की जाती है, जिसे काली पूजा या श्यामा पूजा कहा जाता है।

  • आधी रात को होती है पूजा: देश के अन्य हिस्सों में जहाँ दिवाली की शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है, वहीं बंगाल में मुख्य काली पूजा और आधी रात की आरती का विशेष विधान होता है।
  • शक्ति की उपासना: बंगाल में आदि शक्ति (नारी शक्ति) की आराधना का विशेष महत्व है। यहाँ मां काली को भय का नाश करने वाली, अहंकार और बुराई का अंत करने वाली मां के रूप में पूजा जाता है।
  • प्रसिद्ध मंदिर: इस अवसर पर दक्षिणेश्वर काली मंदिर और कालीघाट काली मंदिर जैसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और रात भर अनुष्ठान चलते हैं।

3. अमृतसर (पंजाब) — रोशनी से जगमगाता ‘बंदी छोड़ दिवस’

​स्वर्ण नगरी अमृतसर में दिवाली के दिन ही बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है। सिख इतिहास के अनुसार, छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी के ग्वालियर किले से रिहाई के साथ 52 राजाओं की मुक्ति के उपलक्ष्य में श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) को दीपों और आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है।

4. वाराणसी (उत्तर प्रदेश) — कार्तिक पूर्णिमा पर अनूठी ‘देव दीपावली’

​काशी (वाराणसी) में मुख्य दिवाली के ठीक 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन सभी देवता गंगा स्नान के लिए पृथ्वी पर उतरते हैं। अस्सी घाट से राजघाट तक लाखों दीयों की रोशनी और भव्य गंगा आरती से पूरा गंगा तट अलौकिक प्रतीत होता है।

5. जयपुर (राजस्थान) — गुलाबी शहर के बाजारों की अद्भुत सजावट

​राजपूतों की शान जयपुर में दिवाली के दौरान जौहरी, बापू, त्रिपोलिया और किशनपोल जैसे प्रसिद्ध बाजार अनूठी रंग-बिरंगी रोशनी से नहा उठते हैं। व्यापारियों की समितियों के बीच सर्वश्रेष्ठ सजावट करने की स्वस्थ होड़ इस पर्व की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है।

6. पणजी (गोवा) — बुराई के प्रतीक ‘नरकासुर’ के विशाल पुतले

​गोवा में नरक चतुर्दशी के अवसर पर दिवाली से एक दिन पहले बुराई के प्रतीक नरकासुर के विशालकाय पुतले जलाए जाते हैं। इन्हें बांस, कपड़े और कागज से तैयार कर रातभर सड़कों पर घुमाया जाता है, जो भगवान कृष्ण द्वारा अधर्म के नाश का प्रतीक है।

7. अहमदाबाद (गुजरात) — नए बही-खातों का ‘चोपड़ा पूजन’ और नया साल

​गुजरात के व्यापारिक जगत में दिवाली के दिन नए वित्तीय खातों की पूजा यानी ‘चोपड़ा पूजन’ की परंपरा है। व्यापारी मां लक्ष्मी व सरस्वती का आह्वान कर अपने बही-खातों पर ‘शुभ-लाभ’ लिखते हैं। इसके अगले दिन गुजराती नववर्ष ‘बेस्टु वरस’ हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

8. चेन्नई (तमिलनाडु) — सूर्योदय से पहले ‘गंगा स्नानम’ और पारंपरिक पकवान

​दक्षिण भारत में तमिलनाडु वासी सुबह सूर्योदय से पूर्व तिलों के तेल से ‘गंगा स्नानम’ कर नए वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन घरों में अधिरसम, पायसम और मुरुक्कू जैसे पारंपरिक और स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं, साथ ही कांचीपुरम के मंदिरों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं।

9. भुवनेश्वर (उडिशा) — पूर्वजों के मार्ग के लिए ‘कौड़िया काठी’

​ओडिशा में दिवाली की रात सूखी जूट की डंडियों के गुच्छे को जलाकर आसमान की तरफ उठाने की परंपरा है, जिसे ‘कौड़िया काठी’ कहते हैं। मान्यता है कि इसके जरिए पितृपक्ष में आए पूर्वजों को प्रकाशपुंज दिखा कर विदा किया जाता है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बाहर इस रस्म को देखने भारी भीड़ उमड़ती है।

10. मुंबई (महाराष्ट्र) — संगीतमय सुबह ‘दिवाली पहाट’

​मायानगरी मुंबई में दिवाली की शुरुआत बेहद अनूठे और सुकून भरे अंदाज में ‘दिवाली पहाट’ (संगीतमय सुबह) से होती है। साल 1985 से शुरू हुई इस सांस्कृतिक परंपरा के तहत भोर में शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत और भक्ति गीतों के भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

प्रकाश और उमंग का यह पर्व देश के कोने-कोने में विभिन्न संस्कृतियों और रंगों के साथ समरसता का संदेश देता है। आप सभी को इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!

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