* 16 हजार महिला पुलिसकर्मी, 500 थानों में 24×7 हेल्प डेस्क और जीरो टॉलरेंस की नीति… लेकिन क्या इससे महिलाओं का डर सचमुच खत्म होगा?
Durga Squad : पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘दुर्गा स्क्वॉड’ बनाने का ऐलान किया है। इस विशेष यूनिट में करीब 16 हजार महिला पुलिस कांस्टेबल शामिल होंगी, जिन्हें खास प्रशिक्षण देकर राज्यभर में मोटरसाइकिल पर गश्त के लिए तैनात किया जाएगा। शुरुआत में इनके लिए 213 मोटरसाइकिलें उपलब्ध कराई गई हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसके साथ ही राज्य के 500 थानों में 24 घंटे महिला हेल्प डेस्क और साइबर क्राइम हेल्प डेस्क शुरू करने की भी घोषणा की। उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सरकार “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाएगी और हर शिकायत पर बिना किसी राजनीतिक दबाव के तुरंत एफआईआर दर्ज होगी।
आखिर क्यों पड़ी दुर्गा स्क्वॉड की जरूरत?
बीते कुछ वर्षों में बंगाल कई चर्चित अपराधों की वजह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा। खासकर R. G. Kar Medical College and Hospital में जूनियर डॉक्टर से रेप और हत्या तथा कोलकाता के एक लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ गैंगरेप की घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
महिलाओं का कहना है कि डर सिर्फ रात का नहीं, बल्कि कार्यस्थल से लेकर घर लौटने तक हर पल बना रहता है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बंगाल देश के सबसे प्रभावित राज्यों में रहा है। हर साल 34 हजार से अधिक मामले दर्ज होते हैं और अपराध दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। चिंता की बात यह भी है कि ऐसे मामलों में सजा की दर बेहद कम बताई गई है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि असली तस्वीर सरकारी आंकड़ों से भी ज्यादा गंभीर है। ग्रामीण इलाकों में कई मामले सामाजिक दबाव, लोकलाज या कथित “कंगारू अदालतों” के कारण पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते।
तस्करी का बदलता नेटवर्क
महिलाओं और लड़कियों की तस्करी भी बंगाल की बड़ी चुनौती बनी हुई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अब तस्कर सोशल मीडिया के जरिए नौकरी, शादी और बेहतर भविष्य का झांसा देकर युवतियों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। बाद में उनकी निजी तस्वीरों और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर उनका शोषण किया जाता है।
क्या दुर्गा स्क्वॉड बदल पाएगी हालात?
महिला अधिकार कार्यकर्ता इस पहल का स्वागत तो कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि सिर्फ नई यूनिट बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी।
उनके मुताबिक, यदि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करे, राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म हो, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलें और हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हो, तभी महिलाओं का भरोसा लौट सकेगा।
असली परीक्षा अब शुरू
दुर्गा स्क्वॉड सरकार की एक बड़ी पहल जरूर है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह सिर्फ सरकारी घोषणा बनकर रह जाती है या फिर सड़कों पर महिलाओं को वास्तव में सुरक्षित महसूस कराने वाली ताकत साबित होती है। बंगाल की महिलाएं अब वादों से ज्यादा जमीनी बदलाव का इंतजार कर रही हैं।