Ram Mandir : साजिश, संदेश, डर या धमकी? चंपत राय अभी ‘मौन’, लेकिन संकेत साफ—SIT रिपोर्ट के बाद होगा बड़ा खुलासा!

Bindash Bol

Ram Mandir : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं रह गया है। अब सवाल ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, अंदरूनी खींचतान और जिम्मेदारियों पर भी उठने लगे हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय की एक चिट्ठी ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

अब तक पूरी तरह खामोश रहे चंपत राय ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल वह चुप हैं, लेकिन यह चुप्पी हमेशा नहीं रहेगी। उन्होंने कहा है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह हर आरोप का बिंदुवार जवाब देंगे। सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ सफाई है या फिर ट्रस्ट के भीतर छिपे बड़े राज़ सामने आने की चेतावनी?

“फिलहाल मौन हूं… लेकिन समय आने पर सब बताऊंगा”

सोशल मीडिया पर जारी अपने पत्र में चंपत राय ने कहा कि चढ़ावे की चोरी को लेकर उन पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने फिलहाल प्रतिक्रिया न देने का फैसला किया है, लेकिन एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।

उन्होंने एक और गंभीर सवाल उठाया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट गोपनीय थी, फिर वह सार्वजनिक कैसे हो गई? आखिर रिपोर्ट लीक किसने की और क्यों? यह सवाल अब जांच से ज्यादा सिस्टम की विश्वसनीयता पर खड़ा हो गया है।

SIT को भेजे जवाब में अनिल मिश्रा पर गंभीर सवाल

चंपत राय ने एसआईटी को दिए अपने जवाब में ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा पर सीधे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 6 फरवरी 2025 को चढ़ावा गिनने के लिए एसबीआई और ट्रस्ट के बीच हुआ एमओयू उनकी मंजूरी के बिना साइन किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि गिनती कक्ष की व्यवस्था बदली गई, नियमों में ढील दी गई और बैंकिंग प्रक्रिया जैसी सख्ती लागू ही नहीं की गई। उनका कहना है कि अगर तय एसओपी का पालन होता तो शायद इतनी बड़ी चोरी संभव ही नहीं होती।

ट्रस्ट के भीतर भरोसा भी टूटा?

ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बैठक में चंपत राय का इस्तीफा तक नहीं दिखाया गया। सिर्फ इतना कहा गया कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पहले इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार किया, लेकिन बाकी सदस्यों के कहने पर मानना पड़ा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि गोपाल राव और अनिल मिश्रा ही लेन-देन संभालते थे।
यानी अब सवाल सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि ट्रस्ट के भीतर पारदर्शिता और आपसी विश्वास का भी है।

VHP और ट्रस्ट की सफाई

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने कहा कि जिसके पास भी कोई सबूत है, वह जांच एजेंसी को सौंपे, लेकिन समाज की आस्था को राजनीतिक हथियार न बनाया जाए।
वहीं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने भी स्वीकार किया कि व्यवस्था में कमियां थीं और गलत लोगों पर भरोसा करने की कीमत चुकानी पड़ी। हालांकि उन्होंने कहा कि अंतिम सच जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

SIT रिपोर्ट ने खोली चोरी की पूरी परत

अब तक चोरी की रकम को लेकर सिर्फ अनुमान लगाए जा रहे थे, लेकिन एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई बड़े खुलासे किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों से 78.94 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, गहने और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ है।
सीसीटीवी फुटेज में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच 70 बार चोरी दर्ज होने का दावा किया गया है। जांच में सामने आया कि कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां कपड़ों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर बाहर ले जाते थे। कई आरोपी चोरी की रकम बैंक खातों में जमा करते रहे, एफडी कराई गई, रिश्तेदारों के खातों का इस्तेमाल हुआ और जमीन-मकान तक खरीदे गए।

SOP सिर्फ कागजों में रह गई!

एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक दान गिनती के लिए बनाई गई पूरी एसओपी की खुलेआम अनदेखी की गई।

* बाहर निकलते समय तलाशी नहीं हुई।

* बिना जेब वाली वर्दी लागू नहीं हुई।

* दानपात्रों की अलग-अलग गिनती नहीं की गई।

* पूरा चढ़ावा एक साथ मिलाकर गिना गया।

* सीसीटीवी निगरानी कमजोर रही।

* रिकॉर्ड, रसीद और प्रमाणन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही मिली।

अगर ये नियम लागू होते तो क्या करोड़ों की आस्था पर सवाल खड़े होते? यही सबसे बड़ा प्रश्न है।

अब राजनीति भी चरम पर

मामला सामने आने के बाद राजनीतिक हमला भी तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि चढ़ावा चोरी ने बीजेपी की “धर्म और धन की राजनीति” की पोल खोल दी है।
कांग्रेस ने लखनऊ में ‘सद्बुद्धि पदयात्रा’ निकाली, जबकि महाराष्ट्र में ‘रघुपति राघव राजा राम आंदोलन’ शुरू कर सरकार को घेरा।
उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि एसआईटी ने “दूध का दूध और पानी का पानी” कर दिया है। उन्होंने विपक्ष पर हिंदू आस्था को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि जिन लोगों को राम मंदिर से तकलीफ है, वही इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल…

राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में सवाल सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि भरोसे का भी है।
क्या चंपत राय एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद ऐसे खुलासे करेंगे जो पूरे विवाद की दिशा बदल देंगे? क्या ट्रस्ट के भीतर की अंदरूनी लड़ाई अब खुलकर सामने आएगी? और क्या इस मामले में सिर्फ कर्मचारी जिम्मेदार हैं या जवाबदेही ऊपर तक तय होगी?
इन सवालों के जवाब अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और चंपत राय की अगली चुप्पी टूटने का इंतजार कर रहे हैं।

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