ध्रुव गुप्त
(आईपीएस) पटना
Happy New Year 2026 : नए साल के स्वागत में जश्न और हंगामे का माहौल बनने लगा है। हर बार की तरह इस बार भी लगता है कि आने वाले साल में कुछ नया , कुछ खास होने वाला है। सच तो यह है कि सब कुछ वही रहेगा – वही समाज, वही रहनुमा, वही सियासत, वही सामाजिक-आर्थिक विषमताएं, वही यौन अपराध, वही हिन्दू-मुस्लिम, वही असहिष्णुता, वही युद्धोन्माद। हां, आज के इस जश्न में असंख्य मुर्गे और बकरे ज़रूर कट जाएंगे। शराब की नदियां बहेंगी। बिहार जैसे राज्य में जहां दारूबंदी है,वहां नकली, जहरीली शराब पीकर कुछ लोग मरेंगे। होटलों में नंगी, अधनंगी लड़कियां नचाई जाएंगी। नए साल में अगर सचमुच कुछ नए की चाह है तो एक नई शुरुआत ही करनी होगी। कुछ ऐसा कि हमारा समाज थोड़ा और मुलायम, थोड़ा और सुंदर, थोड़ा और निरापद बनें। राजनीति को ख़ुद पर इस कदर हावी न होने दें कि वह हमारा विवेक और हमारी वैचारिक स्वतंत्रता छीनकर हमें मानसिक तौर पर पंगु बना दे।धर्मों की निजता को सड़कों पर ऐसे मत उतारें कि हमारी उदार सामाजिक संरचना ही टूट जाए। धर्म, राजनीति या विचारधारा हमारे लिए बनी हैं, हम उनके लिए नहीं बने। इनमें से कुछ भी एक इंसानी जान से ज्यादा मूल्यवान नहीं है। नए साल में हम आपसी प्यार और समझ बढ़ाने की कोशिशें करें। सड़कों पर मानसिक दरिद्रता के प्रदर्शन के बज़ाय आसपास की थोड़ी साफ-सफाई कर लें। कुछ पेड़-पौधे लगाएं। खाए-अघाए लोगों के साथ मस्ती करने की जगह खुशियां उनके साथ भी बांटे जिन्हें उनकी ज़रुरत है। थोड़ी सी मुस्कान उन होंठों पर धरें जो मुस्कुराना भूल गए हैं। जो अपने रूठे बैठे हैं, उन्हें मना लें। तमाम कमियों के बावज़ूद यह दुनिया अब भी खूबसूरत है। इसे महसूस करने के लिए किसी राजनीतिक या धार्मिक चश्मे,नशे या पागलपन की नहीं, थोड़ी संवेदनशीलता की दरकार है।
आप सभी मित्रों को नववर्ष की शुभकामनाएं !
मूर्तिकला – Jirga Sculpteur