India Seychelles : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स राजकीय यात्रा भारत की हिंद महासागर नीति और वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई। इस दौरे के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, शिक्षा, कृषि और विकास सहयोग समेत 19 महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों पर सहमति बनी। इन समझौतों ने दोनों देशों की 50 वर्षों पुरानी दोस्ती को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को भी और मजबूत कर दिया है।
यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों देशों के बीच ठोस परिणाम सामने आए। भारत ने एक बार फिर साबित किया कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में केवल सुरक्षा साझेदार ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद विकास सहयोगी भी है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा को मिली नई मजबूती
भारत और सेशेल्स के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय अपराधियों और भगोड़ों के खिलाफ प्रभावी कानूनी सहयोग मिलेगा। भारत ने सेशेल्स को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल PS LESPWAR भी सौंपा। इसके अलावा डोर्नियर विमान के ग्लास कॉकपिट अपग्रेड, कोस्ट गार्ड पोत PS Zoroaster के रीफिट, 10 यूटिलिटी वाहन और 5 लेजर रेडियल क्लास नौकाओं की सहायता से समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली।
सेशेल्स में भी चलेगा UPI
दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही सेशेल्स में UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने का समझौता। इससे भारतीय पर्यटक, कारोबारी और प्रवासी आसानी से डिजिटल लेन-देन कर सकेंगे। इसके साथ ही भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगा।
अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और शिक्षा में बढ़ा सहयोग
दोनों देशों ने अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और सैटेलाइट एप्लिकेशन पर समझौता किया, जिससे ISRO की वैश्विक पहुंच को बल मिलेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में जनऔषधि योजना, नए राष्ट्रीय अस्पताल के विकास तथा छह आधुनिक एम्बुलेंस की सहायता जैसी पहलें दोनों देशों के बीच जनकल्याण आधारित साझेदारी को मजबूत करेंगी।
विकास परियोजनाओं को मिलेगा नया बल
भारत ने सेशेल्स के विकास के लिए लगभग ₹1250 करोड़ की अम्ब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराई है। इसके अलावा 500 मीट्रिक टन चावल और 8500 मीट्रिक टन सीमेंट की सहायता देकर खाद्य सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के विकास में सहयोग बढ़ाया गया है।
रोजगार, शिक्षा और कृषि में नए अवसर
नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन को लेकर हुए समझौते से भारतीय समुद्री पेशेवरों के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में 2026-2031 की संयुक्त कार्ययोजना पर भी सहमति बनी, जबकि तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा केंद्र की आधारशिला रखी गई।
जलवायु और आपदा प्रबंधन में भी साथ
सेशेल्स ने भारत की पहल CDRI (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) की सदस्यता स्वीकार की है, जिससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए दोनों देशों का सहयोग और मजबूत होगा।
50 वर्षों की दोस्ती को मिला नया आयाम
भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने पर स्मारक लोगो लॉन्च किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “हिंद महासागर हमारा साझा घर है और इसकी सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि हमारी साझा जिम्मेदारी है। भारत का लक्ष्य इसे ‘Ocean of Opportunity’ बनाना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और सेशेल्स केवल साझेदार नहीं, बल्कि विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के गहरे रिश्तों से जुड़े पुराने मित्र हैं। भारत का ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख आधार बनेगा।
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान “Guardian of the Blue Horizon” भी प्रदान किया गया, जिसे उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे दुनिया के सभी देशों को समर्पित किया।
इन 19 समझौतों के साथ भारत और सेशेल्स की रणनीतिक साझेदारी एक नए दौर में प्रवेश कर गई है। रक्षा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और विकास को भी नई दिशा देगा।