Jharkhand : झारखंड की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी पूरी सरकारी सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी वाहन वापस कर दिए। जैसे ही यह खबर सामने आई, राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि आखिर हेमंत सोरेन सरकार के वित्त मंत्री ने ऐसा बड़ा फैसला क्यों लिया?
दरअसल, मंत्री की नाराजगी की वजह सुरक्षा व्यवस्था में एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाना है। राधाकृष्ण किशोर का कहना है कि उनकी सुरक्षा में 16 पुलिसकर्मी और केवल तीन सरकारी वाहन लगाए गए हैं। उनके मुताबिक, तीन गाड़ियों में 16 सुरक्षाकर्मियों का समायोजन न तो व्यावहारिक है और न ही किसी आपात स्थिति में सुरक्षित।

तीन बार लिखा, फिर भी नहीं मिला जवाब
वित्त मंत्री ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में 14 मार्च, 21 अप्रैल और 29 जून को पुलिस महानिदेशक (DGP) को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर एक अतिरिक्त वाहन की मांग की थी। उनका आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण मामले पर न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही उनके पत्रों का जवाब दिया गया।
स्थिति तब और असहज हो गई, जब उनके विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी ने उन्हें सरकारी वाहन लौटाने का नोटिस भेज दिया। इससे आहत होकर मंत्री ने सुरक्षा में तैनात सभी 16 सुरक्षाकर्मियों और तीनों सरकारी वाहनों को वापस कर दिया।
“मैं पलामू से आता हूं, सुरक्षा की अहमियत समझता हूं”
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वह माओवाद प्रभावित पलामू क्षेत्र से आते हैं और अच्छी तरह जानते हैं कि पर्याप्त सुरक्षा कितनी जरूरी होती है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी से टकराव नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना है ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी और व्यावहारिक बन सके।
मुख्यमंत्री से नहीं की शिकायत
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दी थी, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर कोई शिकायत नहीं की। उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री को जानकारी होती, तो निश्चित रूप से उचित कार्रवाई होती। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह पुलिस विभाग की जिम्मेदारी थी और उनका मकसद केवल व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करना है।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल सिर्फ एक अतिरिक्त गाड़ी का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली, मंत्री के पत्रों की अनदेखी और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का भी है।