24 दिनों का संघर्ष रंग लाया: झारखंड में CGL परीक्षा रद्द, मंत्रियों की मौजूदगी में खत्म हुई छात्रों की भूख हड़ताल
देर रात सदर अस्पताल में खत्म हुआ 16 दिनों का ‘महा-उपवास’: छात्र आंदोलन के आगे बैकफुट पर आई हेमंत सरकार
Jharkhand : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर पिछले 24 दिनों से चल रहा छात्रों का महा-आंदोलन आखिरकार एक ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंच गया। छात्र शक्ति की अटूट एकजुटता और दृढ़ संकल्प के आगे सरकार को कदम वापस खींचने पड़े। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL की सभी परीक्षाओं को रद्द करने के ऐलान के साथ ही युवाओं का यह संघर्ष जीत में तब्दील हो गया।
अस्पताल के वार्ड में खत्म हुआ 16 दिनों का अनशन
फैसले की घोषणा के बाद देर रात रांची सदर अस्पताल में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। 16 दिनों से अनशन पर डटे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जिनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना उपवास समाप्त किया।
* अनशन समाप्ति: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और विधायक जयराम महतो देर रात अस्पताल पहुंचे।
* जूस पिलाकर तोड़ा उपवास: मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने देवेंद्र नाथ महतो को जूस पिलाया, वहीं विधायक जयराम महतो ने उन्हें अपने हाथों से निवाला खिलाकर अनशन समाप्त करवाया।
* स्वास्थ्य स्थिति: स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, मेडिकल जांच के बाद देवेंद्र नाथ महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति का ब्लड प्रेशर और शुगर स्तर सामान्य पाया गया है।
‘यह युवाओं के भविष्य की जीत है’: देवेंद्र महतो
अनशन समाप्त करने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने इस फैसले को राज्य के लाखों मेहनती युवाओं की जीत बताया।
”परीक्षा रद्द करना आसान नहीं था क्योंकि भर्ती प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में थी। इसके बावजूद सरकार ने छात्रों के हित में कड़ा और साहसिक निर्णय लिया। 2 जुलाई से शुरू हुई यह लड़ाई अब सीआईडी जांच के जरिए बड़े अधिकारियों तक पहुंच रही है। मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्रियों और हर उस आम नागरिक का आभारी हूँ जिसने इस संघर्ष में हमारा साथ दिया। आंदोलन रुका है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।”
सरकार का रुख
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार हमेशा छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय राज्य की भर्ती प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। छात्रों की प्रमुख मांगें स्वीकार कर लिए जाने के बाद यह आंदोलन अब औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है।