Jharkhand : झारखंड के रामगढ़ जिले में एक बंद पड़ी कोयला खदान शनिवार को चार लोगों की कब्र बन गई। अवैध तरीके से कोयला निकालने के लिए खदान में उतरे चार मजदूर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के चलते दम घुटने से मौत के मुंह में समा गए। यह दर्दनाक हादसा रामगढ़ वन क्षेत्र के चपरी-बुमरी इलाके में हुआ, जिसने एक बार फिर बंद खदानों की सुरक्षा व्यवस्था और अवैध खनन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई, जिसके बाद पुलिस और CCL की रेस्क्यू टीम पहुंची। चारों को बाहर निकालकर रामगढ़ सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक दो लोगों की मौत हो चुकी थी। बाकी दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
मृतकों की पहचान छोटकी टोंगी सिरका अरगड्डा निवासी देवा कुमार बेदिया और डब्ल्यू बेदिया, जबकि सिरका बुध बाजार निवासी आशीष रजवार और किशोर रवानी के रूप में हुई है।
रामगढ़ सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. हरेंद्र कुमार महतो ने चारों मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की विशेष टीम गठित की गई है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जा रही है और मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
माइंस सुपरिटेंडेंट विकास कुमार ने बताया कि जब उनकी 12 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची तो खदान के भीतर जहरीली गैस का स्तर बेहद खतरनाक था और ऑक्सीजन लगभग न के बराबर थी। ऐसे हालात में अंदर जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा था।
घटना के बाद रामगढ़ SDO कृष्ण मुरारी तिर्की और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रामगढ़ वन क्षेत्र में बुमरी-गिद्दी के आसपास कई बंद खदानें हैं, जहां लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतें मिलती रही हैं। सवाल यह है कि जब इन खदानों में बार-बार लोग उतर रहे हैं, तो आखिर सुरक्षा और निगरानी के दावे जमीन पर क्यों नहीं दिखते? चार जिंदगियां चली गईं, लेकिन अब भी जिम्मेदारी तय होना बाकी है।