Jharkhand Topper : झारखंड की माटी और किसानों के पसीने से सिंचित लुपुंग गाँव ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया है। यह वही गाँव है जिसने भुवनेश्वर मेहता जैसे क्रांतिकारी सपूत को जन्म दिया, जिन्होंने कभी सत्ता के शिखर पर बैठे पूर्व वित्त व विदेश मंत्री को शिकस्त देकर गरीबों की आवाज़ बुलंद की थी। आज उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए लुपुंग की एक बेटी ने शैक्षणिक क्रांति का बिगुल फूंक दिया है।
प्रियांशु कुमारी: संघर्ष और सफलता की नई परिभाषा
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की मैट्रिक परीक्षा के परिणामों ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय की छात्रा प्रियांशु कुमारी ने 500 में से 498 अंक प्राप्त कर न केवल जिले का, बल्कि पूरे राज्य का मान बढ़ाया है। प्रियांशु का यह ‘परचम’ उन तमाम बाधाओं पर जीत है, जो एक ग्रामीण परिवेश की छात्रा के सामने अक्सर दीवार बनकर खड़ी हो जाती हैं।
पसीने की नींव पर खड़ा हुआ ‘टॉपर’ का महल
लुपुंग गाँव आज अपनी बिटिया की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भावुक भी है और गौरवान्वित भी। यह सफलता केवल प्रियांशु की नहीं, बल्कि..
* उन किसानों की है, जिनकी मेहनत से इस गाँव की बुनियाद समृद्ध हुई।
* उन शिक्षकों की है, जिन्होंने प्रतिभा को तराशने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
* उस परिवार की है, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद प्रियांशु के सपनों को पंख दिए।
”लुपुंग गाँव अब केवल राजनीति के अखाड़े के लिए नहीं, बल्कि मेधा के मंदिर के रूप में भी पहचाना जाएगा। प्रियांशु ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो गाँव की पगडंडियों से निकलकर भी सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है।”
भविष्य की ओर बढ़ते कदम
प्रियांशु की यह जादुई कामयाबी राज्य के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 99.6% अंकों का यह कीर्तिमान बताता है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।
पूरा राज्य आज इस मेधावी बिटिया, उनके समर्पित माता-पिता और गुरुजनों को कोटि-कोटि बधाई देता है। हमारी कामना है कि प्रियांशु भविष्य में सफलता के और भी ऊंचे प्रतिमान स्थापित करें और देश का नाम रोशन करें।