* झारखंड में ‘खाकी’ के खजाने पर डाका: बोगस नामों से करोड़ों का खेल, अब CID और IAS की रडार पर ‘सिस्टम के दीमक’
Jharkhand Treasury Scam : झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस विभाग के ही दो बड़े जिलों में ‘खजाने की चोरी’ का पर्दाफाश हुआ। बोकारो और हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालयों में हुए इस महा-घोटाले ने सरकारी तंत्र की सुरक्षा में बड़े छेद उजागर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के कड़े तेवर के बाद अब सरकार ने तिहरा प्रहार (Triple Action) किया है।
सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर वित्त विभाग ने एक साथ तीन अहम नोटिफिकेशन जारी कर न केवल हाई-लेवल जांच समिति गठित की, बल्कि मामले की जांच सीधे CID को सौंप दी और राज्य के सभी पुलिस कार्यालयों का स्पेशल ऑडिट कराने का आदेश भी दे दिया।
खेल क्या था? कागजी कर्मचारी और असली करोड़ों!
जांच में जो खुलासा हुआ है वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। पुलिस दफ्तरों में ऐसे कर्मचारी ‘पैदा’ किए गए जो असल में थे ही नहीं! इन ‘बोगस’ नामों पर सालों तक वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाओं के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये डकारे गए। जब तक सच सामने आता, तब तक जनता की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिस्टम के दीमकों की जेब में जा चुका था।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि कोषागार प्रणाली का इस्तेमाल कर बोगस कर्मचारियों के नाम पर वेतन, भत्ते और अन्य मदों से भारी रकम निकाली गई।
यह अनियमितता सामने आते ही हजारीबाग और बोकारो में एफआईआर दर्ज हुई—जिससे संकेत मिला कि मामला सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।



सरकार का ‘ऑपरेशन क्लीन’: तीन बड़े वार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त विभाग ने एक साथ तीन बड़े मोर्चों पर कार्रवाई शुरू कर दी है…
1. IAS अमिताभ कौशल की ‘सुपर-कमेटी’
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय टीम गठित की गई है। इसमें एनआईसी के आईटी एक्सपर्ट्स से लेकर महालेखाकार कार्यालय के महारथी शामिल हैं। यह कमेटी सिर्फ दोषियों को ही नहीं खोजेगी, बल्कि सिस्टम की उस ‘कमजोरी’ को भी ठीक करेगी जिसका फायदा उठाकर यह डाका डाला गया।
समिति का मुख्य लक्ष्य..
* अवैध निकासी की परत-दर-परत जांच
* जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान
* ट्रेजरी सिस्टम में सुरक्षा सुधार की सिफारिश
2.CID की एंट्री : अब बड़े खुलासों की उम्मीद
हजारीबाग (FIR 32/26) और बोकारो (FIR 62/26) में दर्ज मामलों की जांच अब राज्य की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CID करेगी। अब फाइलें खुलेंगी और सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की बारी है।अब एजेंसी दर्ज एफआईआर के आधार पर..
* वित्तीय ट्रेल खंगालेगी
* संभावित नेटवर्क की पहचान करेगी
* नए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकेगी
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ सकता है और कई जिलों तक जांच पहुंचने की संभावना है।
3.पूरे राज्य में स्पेशल ऑडिट का आदेश (Special Audit)
सरकार ने केवल दो जिलों पर रुकने का फैसला नहीं किया है। अब राज्य के सभी जिलों के SP कार्यालयों का ‘स्पेशल ऑडिट’ होगा। डर इस बात का है कि कहीं यह संक्रमण राज्य के अन्य कोनों में भी तो नहीं फैला है?
जांच की ‘कमांडो टीम’ में कौन-कौन?
सरकार ने जांच के लिए अपनी सबसे अनुभवी टीम उतारी है…
अध्यक्ष: अमिताभ कौशल (प्रधान सचिव, उत्पाद एवं मद्य निषेध)
तकनीकी टीम: ओमप्रकाश सिन्हा (NIC) और गौरव कुमार (IT एक्सपर्ट)
वित्तीय टीम: ज्योति कुमारी झा, कपिल देव पंडित (वित्त विभाग) और प्रधान महालेखाकार के प्रतिनिधि।
चर्चा क्यों है जरूरी?
यह घोटाला सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं है, बल्कि उस विभाग के भीतर की सेंधमारी है जिस पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है। क्या कुछ छोटे बाबू और कर्मचारी मिलकर इतना बड़ा खेल कर सकते थे? या फिर इसके पीछे कोई ‘बड़ा सिंडिकेट’ काम कर रहा है?
झारखंड सरकार की इस कार्रवाई ने संदेश साफ दिया है—”सरकारी खजाना जनता की अमानत है, और इस पर हाथ डालने वालों की जगह सलाखों के पीछे होगी।”
अब सबकी नजरें CID और अमिताभ कौशल कमेटी की उस रिपोर्ट पर हैं, जो आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में बड़ा भूचाल ला सकती है।