Neha Bora : नेहा अल्गोरिदम… इस्लामिक कट्टरता ही हिंदुस्तान से लड़ सकती है                              

Bindash Bol

* कांग्रेस और वाम की लुटिया डुबोने आती टोली की सरदारन है नेहा

उमानाथ लाल दास

Neha Bora : हिंदू समाज के परंपरागत मूल्यों आदर्शों से घृणा तथा मुस्लिम समाज को आधुनिकता के खिलाफ भड़काने के मकसद से इस वामपंथन नेहा बोरा की जहरीली भाषणबाजी पर अंकुश नहीं लगा तो यह पूरा समाज एक दिन बदरंग होकर बिखर जाएगा। दरअसल वह यह जानती है कि समावेशी भारतीय समाज से किसी में लड़ने का माद्दा है तो वह है मुस्लिम समाज। और इसके लिए मुस्लिम समुदाय का पोटेंशियल पार्ट है उसकी कट्टरता! शरीयत और नबी के उसूलों पर चलकर ही यह मुमकिन है। इसीलिए इसके उम्मत, शरीयत, नबी के खतरनाक उसूल को पालना-पोसना होगा। इस समाज को अपने पांव पर खड़े होने का मतलब लड़ने का माद्दा उभारना होगा, उकसाना होगा! यहां आकर राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक हो जाता है।

शर्जिल इमाम अपने एक भाषण में साफ कहते हैं कि आजादी के बाद से मुस्लिम समाज की परेशानियां और बढ़ी हैं! उनकी लड़ाई आजादी के बाद से चले आ रहे निजाम से है, न कि भाजपा से! किसी ने कुछ नहीं दिया है! उसे भाजपा का दुश्मन बनाकर कांग्रेस अपना काम निकालती रही! उसे न कांग्रेस चाहिए न भाजपा! उसे वह चाहिए जो उसकी शर्तों (खांटी इस्लाम के साथ) पर चलना मंजूर करे! और वह अंग्रेजी हुकूमत के बाद आए इस निजाम में मुमकिन नहीं! इसीलिए वह दस कदम आगे बढ़कर कहते हैं कि बीसवीं सदी का सबसे बड़ा फासिस्ट नेता गांधी हुआ है!

उमर खालिद और शर्जिल इमाम को बेइंतहा चाहने वाली नेहा की मंशा एकदम क्रिस्टल क्लियर है कि सनातनी समाज से लड़ाने के लिए मुस्लिम समाज का कट्टर बने रहना जरूरी है। इसके थिंकिंग पैटर्न या इसके अल्गोरिदम को हैक नहीं किया गया तो यह एक दिन जिन्ना और अंग्रेजी हुकूमत से ज्यादा खतरनाक साबित होगी।

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