One Officer One Car Rule :​ ‘वन ऑफिसर, वन कार’ नियम लागू .. मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब अफसरों को मिलेगी सिर्फ एक ही सरकारी गाड़ी

Bindash Bol

One Officer One Car Rule : केंद्र सरकार ने सरकारी संसाधनों के सही इस्तेमाल और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब केंद्र सरकार के अधिकारियों के लिए “वन ऑफिसर, वन ऑफिशियल कार” (One Officer, One Official Car) नियम लागू कर दिया गया है।

​इस नई नीति के तहत किसी भी केंद्रीय अधिकारी को—चाहे उसके पास कितने भी अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) क्यों न हों—केवल एक ही सरकारी गाड़ी मिलेगी।

खबर के प्रमुख बिंदु (Key Highlights)

अतिरिक्त जिम्मेदारी, लेकिन गाड़ी एक ही

यदि कोई अफसर अपने मूल पद के अलावा किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, PSU या स्वायत्त संस्था का काम संभाल रहा है, तो भी उसे दूसरी गाड़ी नहीं दी जाएगी।

PSU और स्वायत्त संस्थाओं की गाड़ियों पर रोक

अधिकारी अब सामान्य परिस्थितियों में सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) या अर्ध-सरकारी निकायों की गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। केवल आधिकारिक दौरे या बैठकों के दौरान ही इसमें छूट मिलेगी।

बेकार खड़ी गाड़ियों पर पैनी नजर

बिना उपयोग खड़ी रहने वाली सरकारी गाड़ियों की निगरानी होगी और उन्हें सुरक्षित पार्क किया जाएगा, ताकि ईंधन और रख-रखाव का खर्च बचे।

2022 के नियमों में और सख्ती

वित्त मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि यह आदेश सितंबर 2022 के निर्देशों को और अधिक कड़ाई से लागू करने के लिए जारी किया गया है।

वित्त मंत्रालय ने जारी किया ‘कार्यालय ज्ञापन’

​वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि एक से अधिक विभागों का काम देख रहे अफसरों को दूसरी कार देने की पुरानी परंपरा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

नियम का मुख्य संदेश…

अधिकारी चाहे जितनी अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभाले, उसके पास इस्तेमाल के लिए आधिकारिक वाहन केवल एक ही रहेगा।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

​अक्सर देखा जाता था कि एक ही अधिकारी के पास कई मंत्रालयों या संस्थाओं का प्रभार होने के कारण multiple सरकारी गाड़ियाँ आ जाती थीं।

* हर अतिरिक्त गाड़ी के साथ.. ईंधन (Fuel) का भारी खर्च

* ​ड्राइवर का वेतन​

* रख-रखाव और मरम्मत (Maintenance) का खर्च

​सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ता था। नई नीति से इन सभी बेफिजूल के खर्चों पर तुरंत रोक लगेगी।

इस फैसले से क्या-क्या बदलाव और फायदे होंगे?

* ​वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline): टैक्सपेयर्स के पैसे और सरकारी धन की बचत होगी।

* ​पारदर्शिता और जवाबदेही: गाड़ियों का दुरुपयोग रुकेगा और प्रशासनिक पारदर्शी व्यवस्था कायम होगी।

* संसाधनों का सही प्रबंधन: वाहनों के गैर-ज़रूरी दोहराव (Duplication) पर लगाम लगेगी और सरकारी बेड़े का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
मोदी सरकार की “वन एंटाइटल्ड ऑफिसर, वन ऑफिशियल कार” नीति प्रशासनिक ढांचे में एकरूपता लाने, खर्चों में कटौती करने और सरकारी संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में एक बेहद अहम कदम साबित होगी।

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