* … अब कॉमनवेल्थ में भारत का तिरंगा लहराने वाला हीरो बने झंडू कुमार
Para Powerlifter Jhandu Kumar: कुछ कहानियां सिर्फ पदक जीतने की नहीं होतीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और सपनों की जीत की मिसाल बन जाती हैं। बिहार के नालंदा जिले के छोटे से कस्बे हरनौत के रहने वाले 28 वर्षीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 130.9 अंक हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उनके इस पदक के साथ ही भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेडल खाता भी खुल गया।
लेकिन इस चमकते पदक के पीछे संघर्षों की ऐसी दास्तान छिपी है, जिसे सुनकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा।
5 साल की उम्र में पोलियो ने बदल दी जिंदगी
झंडू कुमार जब महज 5 साल के थे, तभी पोलियो ने उनके पैरों को प्रभावित कर दिया। जहां कई लोग ऐसी परिस्थितियों में उम्मीद छोड़ देते हैं, वहीं झंडू ने अपनी दिव्यांगता को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया। उन्होंने ठान लिया कि एक दिन अपने दम पर दुनिया को जवाब देंगे।
गरीबी ने हर कदम पर ली परीक्षा
झंडू कुमार का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता किसान हैं और परिवार की आय बेहद सीमित थी। कई बार ऐसा समय आया जब खेल छोड़ देने की नौबत आ गई, क्योंकि ट्रेनिंग, डाइट और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाना आसान नहीं था।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए कभी सब्जियां बेचीं, तो कभी ई-रिक्शा चलाया। दिनभर मेहनत कर परिवार का सहारा बने और फिर उसी थकान के साथ जिम पहुंचकर घंटों अभ्यास किया। यही संघर्ष आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
जिम से शुरू हुआ सफर, दुनिया तक पहुंचा नाम
शुरुआत में झंडू कुमार ने अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए जिम जाना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी ताकत और आत्मविश्वास बढ़ता गया। मेहनत रंग लाई और उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग को अपना करियर बना लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया।
उपलब्धियां जो बताती हैं उनकी मेहनत की कहानी
* कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल
* खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025: 72 किलोग्राम वर्ग में 206 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड
* वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड कप 2025: ब्रॉन्ज मेडल
* एशिया-ओशिनिया ओपन चैंपियनशिप: ब्रॉन्ज मेडल
* वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025: छठा स्थान
झंडू कुमार की कहानी क्यों है खास?
झंडू कुमार की जिंदगी हमें सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है। जिस युवक ने कभी पेट पालने के लिए सब्जियां बेचीं और ई-रिक्शा चलाया, आज वही भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर करोड़ों लोगों की प्रेरणा बन गया है।
उनका यह ब्रॉन्ज मेडल सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए उम्मीद का संदेश है जो गरीबी, संसाधनों की कमी या शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को सच करना चाहते हैं।
झंडू कुमार से जुड़े अहम सवाल
1. झंडू कुमार कौन हैं?
झंडू कुमार बिहार के नालंदा जिले के हरनौत के रहने वाले भारतीय पैरा पावरलिफ्टर हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
2. उन्हें पोलियो कब हुआ था?
महज 5 साल की उम्र में पोलियो के कारण उनके पैरों पर असर पड़ा था।
3. संघर्ष के दिनों में उन्होंने क्या काम किए?
अपने खेल और परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने सब्जियां बेचीं और ई-रिक्शा भी चलाया।
4. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा का ब्रॉन्ज मेडल उनकी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।