Parimal Nathwani : कोल्डड्रिंक बेचने से राज्यसभा तक… परिमल नाथवानी की संघर्ष, सफलता और सियासत की कहानी

Bindash Bol

कोकिला गजर (अहमदाबाद)

Parimal Nathwani : झारखंड से राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज करने वाले परिमल नाथवानी एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं। एनडीए के समर्थन से चौथी बार राज्यसभा पहुंचने वाले नाथवानी की कहानी सिर्फ राजनीतिक सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, असफलताओं और दृढ़ संकल्प की भी मिसाल है।
आज उद्योग जगत और राजनीति में प्रभावशाली पहचान रखने वाले परिमल नाथवानी कभी छोटे-मोटे कारोबार करके अपनी जिंदगी संवारने की कोशिश कर रहे थे। कॉलेज के दिनों से ही बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखने वाले नाथवानी ने मुंबई में कोल्डड्रिंक बेचने से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने साबुन की डीलरशिप ली, फैक्ट्री भी चलाई, लेकिन कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला। हार मानने के बजाय उन्होंने गुजरात में दर्जनों पीसीओ संचालित किए और यहीं से शेयर बाजार की दुनिया में कदम रखा।
हालांकि, किस्मत ने यहां भी बड़ा झटका दिया। चर्चित हर्षद मेहता शेयर घोटाले के दौरान उनकी बड़ी पूंजी डूब गई। आर्थिक संकट इतना गहरा गया कि वे मानसिक रूप से टूटने लगे और जीवन खत्म करने तक का विचार उनके मन में आया। लेकिन यही वह दौर था जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

धीरूभाई अंबानी से मुलाकात बनी टर्निंग पॉइंट

1990 के दशक के आखिर में परिमल नाथवानी की मुलाकात रिलायंस समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी से हुई। जामनगर में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की नाराजगी समझने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। नाथवानी ने जमीनी स्तर पर काम कर धीरूभाई को विस्तृत रिपोर्ट दी, जिससे वे रिलायंस नेतृत्व के भरोसेमंद सहयोगी बन गए।
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी परियोजना से लेकर रिलायंस के कई महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। आज वे रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक हैं और समूह के शीर्ष नेतृत्व के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं।

खेल, समाजसेवा और राजनीति में भी मजबूत पहचान

परिमल नाथवानी सिर्फ उद्योग जगत तक सीमित नहीं रहे। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रहे और उनके कार्यकाल में अहमदाबाद के विश्वविख्यात नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पुनर्निर्माण की निगरानी की गई। इसके अलावा वे पर्यावरण संरक्षण, विशेषकर गिर के एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए भी सक्रिय रहे हैं।
राजनीतिक सफर की बात करें तो नाथवानी पहली बार 2008 में झारखंड से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद वे कई बार उच्च सदन के सदस्य बने। इस बार भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर उन्होंने झारखंड की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है।

संघर्ष से शिखर तक का सफर

कोल्डड्रिंक बेचने वाले एक युवा कारोबारी से लेकर देश के सबसे बड़े उद्योग समूह के प्रभावशाली पदाधिकारी और चार बार के राज्यसभा सांसद बनने तक का परिमल नाथवानी का सफर बताता है कि असफलताएं मंजिल नहीं, बल्कि सफलता की राह का हिस्सा होती हैं। उनकी कहानी संघर्ष, धैर्य और अवसरों को पहचानने की प्रेरक मिसाल बन चुकी है।

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