Political Satire : नेता जी और कब्र

Bindash Bol

डॉ प्रशान्त करण

Political Satire : एक दिन कब्रिस्तान के एक कर्मचारी से प्रभावित होकर एक नेता ने नशे में अपने राजनैतिक विरोधी के लिए कब्र खोदनी शुरू की और  दिन भर नशे में कब्र खोदता रहा , बिना थके खोदता चला गया कि शाम हो गई और कब्र इतनी गहरी खुद गई कि वो खुद कब्र से बाहर ही ना निकल सका.
उसने बहुत शोर मचाया लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था . रात होने लगी।सर्दी भी बढ़ गई।तभी जनता उधर से गुजरी . जनता के आने की आहट सुन और फिर नीचे से ऊपर उन्हें झाँकता देखते ही नेता जी का नशा टूट गया . नेता जी  ने गिड़गिड़ा कर कहा….
“खुदा , अल्लाह के वास्ते , ईशा मसीह के लिए मुझे बाहर निकालो, मेरा बाहर निकलना बहुत जरूरी है . फिर जेब से संविधान लिखी एक लाल डायरी दिखाकर बोला – देखो ! संविधान खतरे में है , इसे बचाना है , देखते नहीं मैं ठंड से मरा जा रहा हूँ.
”उस जनता ने झांक कर कब्र में देखा और बोला,
“ठण्ड तो तुम्हें लगेगी ही नेता जी .तुझ पर मिट्टी डालना लोग जो भूल गये हैं।”यह कहकर उसने मिट्टी डाल दी ! नेता जी की आवाज धीरे – धीरे थम गयी .जनता चुपचाप चली गई .
 

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