Rahul Gandhi : ‘जरूरत पड़ी तो मैं RSS की रक्षा करूंगा…’,  राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा…

Bindash Bol

Rahul Gandhi : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर अपना राजनीतिक हमला जारी रखते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। दिल्ली में आयोजित ‘रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने साफ कहा कि अगर कभी देश में RSS की अभिव्यक्ति की आजादी को छीनने या उसे दबाने की कोशिश हुई, तो वे उसके अधिकार की रक्षा के लिए खड़े होंगे।

​आखिर RSS और उसकी विचारधारा के सबसे बड़े आलोचकों में शुमार राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा? आइए जानते हैं उनके इस भाषण की 5 बड़ी बातें..

1. “लोकतंत्र में संघ को भी अपनी बात रखने का हक”

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी संगठन या नागरिक की आवाज दबाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है।
​”अगर कल को संघ (RSS) की अभिव्यक्ति की आजादी को भी खत्म करने का प्रयास हुआ, तो मैं उस दिन उनके अधिकार की रक्षा के लिए खड़ा रहूंगा। देश में हर व्यक्ति को बिना डर के अपनी बात कहने का अवसर मिलना चाहिए।”

उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को रोके जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार नियंत्रण के नाम पर देश के युवाओं की आवाज दबा रही है।

2. RSS के बदलते स्वरूप और छोटे कारोबारियों का मुद्दा

​राहुल गांधी ने संघ के ढांचागत बदलावों पर हमला बोलते हुए कहा कि कभी छोटे कारोबारी और मध्यम वर्ग RSS की असली ताकत हुआ करते थे। लेकिन केंद्र सरकार की नोटबंदी और गलत तरीके से लागू की गई GST की नीतियों ने इस वर्ग की कमर तोड़ दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब संघ अपने पुराने सामाजिक आधार को खोकर बड़े कॉरपोरेट और पूंजीपतियों के हितों की राजनीति करने लगा है।

3. पीएम मोदी और अमित शाह पर तीखा तंज

​सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार अब यह समझ चुकी है कि भारत की जनता को ज्यादा समय तक खामोश नहीं रखा जा सकता।

* ​अमित शाह पर तंज: उन्होंने गृहमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन्हें ‘चाणक्य’ या ‘सरदार पटेल’ का दर्जा दिया जाता था, आज संसद के बदले माहौल ने उन्हें नई स्थिति का अहसास करा दिया है।

* ​बदलती अभिव्यक्ति: राहुल ने दावा किया कि देश की जनता अब खुलकर अपने अधिकार मांग रही है और यही बदलाव सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

4. ‘गले लगाना विदेश नीति नहीं…’: मंच पर दिखाया प्रतीकात्मक अंदाज

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति पर व्यंग्य करते हुए राहुल ने कहा, “मुझे आज तक समझ नहीं आया कि सरकार को कब लगा कि सिर्फ किसी को गले लगा लेना (Hugging Diplomacy) ही सबसे बड़ी विदेश नीति है।” अपनी बात को मजाकिया और प्रतीकात्मक अंदाज में समझाने के लिए राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाकर भी दिखाया।

5. प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने पर भी घेरा

​राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने के मुद्दे को फिर उठाया। उन्होंने कहा कि पहले वे इसे कोई ‘मार्केटिंग स्ट्रैटेजी’ मानते थे, लेकिन बाद की परिस्थितियों से समझ आया कि यह सिर्फ सवालों का सामना न कर पाने की हिचकिचाहट है।

​रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में राहुल गांधी का यह संबोधन एक तरफ RSS की वैचारिक आलोचना और कॉरपोरेट से उसके जुड़ाव पर केंद्रित रहा, तो दूसरी तरफ उन्होंने लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांत ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का हवाला देकर संघ के अधिकार का समर्थन भी किया। उनके इस बयान ने एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के बीच अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर नया विमर्श खड़ा कर दिया है।

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