Rajya Sabha Election : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का नामांकन विवादों में घिर गया है। नामांकन पत्र की जांच के दौरान उनके नाम और शपथपत्र में दी गई जानकारियों को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन आपत्तियों के आधार पर उनका नामांकन रद्द किया जा सकता है?
क्या है पूरा विवाद?
परिमल नाथवानी के खिलाफ मुख्य रूप से दो तरह की आपत्तियां उठाई गई हैं।
पहली, उनके विभिन्न दस्तावेजों में नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज है। कुछ दस्तावेजों में उनका नाम “परिमल नाथवानी” लिखा गया है, जबकि कुछ में “नाथवानी परिमल” अंकित है।
दूसरी आपत्ति यह है कि उन्होंने कुछ कंपनियों में निदेशक पद पर रहने की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी है। इसके अलावा आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारी छिपाने और शपथपत्र के कुछ कॉलम खाली छोड़ने के भी आरोप लगाए गए हैं।
क्या केवल नाम की गलती से नामांकन रद्द हो सकता है?
कानून के जानकारों के अनुसार यदि नाम में अंतर होने के बावजूद उम्मीदवार की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित हो रही है, तो केवल इस आधार पर नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता।
क्या कहती है कानून की धारा?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36(4) के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर किसी नामांकन पत्र को केवल तकनीकी या मामूली त्रुटि के आधार पर खारिज नहीं कर सकता। नाम, पता या वर्तनी में छोटी-मोटी गलती, पहचान स्पष्ट होने की स्थिति में, नामांकन रद्द करने का आधार नहीं बनती।
किन परिस्थितियों में रद्द हो सकता है नामांकन?
रिटर्निंग ऑफिसर केवल ठोस कानूनी कारणों के आधार पर ही किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज कर सकता है। इनमें शामिल हैं…
* उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए कानूनी रूप से अयोग्य हो।
* उम्मीदवार किसी संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान के तहत अयोग्य घोषित हो।
* नामांकन पत्र या आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर जमा न किए गए हों।
* नामांकन पत्र निर्धारित प्रारूप में न हो।
* प्रस्तावकों की संख्या या उनके हस्ताक्षरों में कमी या गड़बड़ी हो।
* सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) जमा न की गई हो।
* उम्मीदवार या प्रस्तावकों के हस्ताक्षर फर्जी पाए जाएं।
* निर्धारित प्रारूप में शपथपत्र दाखिल न किया गया हो।
* उम्मीदवार ने अपनी आयु का उल्लेख न किया हो।
* शपथपत्र में महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़े गए हों और नोटिस के बावजूद संशोधित शपथपत्र जमा न किया गया हो।
अब सबकी नजर जांच प्रक्रिया पर
परिमल नाथवानी के खिलाफ उठाई गई आपत्तियां कितनी गंभीर हैं और क्या वे कानूनी रूप से नामांकन रद्द करने के दायरे में आती हैं, इसका फैसला नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर करेंगे। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सभी की निगाहें निर्वाचन अधिकारियों के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।