Rajya Sabha Election : झारखंड में राज्यसभा चुनाव के मतदान में अब सिर्फ कुछ घंटे बाकी हैं, लेकिन उससे पहले रांची की सियासत पूरी तरह उबाल पर है। सत्ता के गलियारों से लेकर फाइव स्टार होटलों तक राजनीतिक शतरंज बिछ चुकी है। मुकाबला झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी के बीच है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा किसी उम्मीदवार की नहीं, बल्कि डुमरी विधायक ‘टाइगर’ जयराम महतो की हो रही है।
होटल में बाड़ेबंदी, बंद कमरों में रणनीति
मतदान से ठीक पहले एनडीए ने अपने विधायकों को रांची के रेडिसन ब्लू होटल में शिफ्ट कर दिया है। बंद कमरों में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी बाड़ेबंदी की जरूरत क्यों पड़ी? क्या एनडीए को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है?
बीजेपी की बैठक से सात विधायक गायब, बढ़ी बेचैनी
परिमल नथवानी की मौजूदगी में बीजेपी कार्यालय में एनडीए विधायकों की अहम बैठक बुलाई गई, लेकिन चंपई सोरेन समेत सात विधायक इसमें नहीं पहुंचे। यही अनुपस्थिति अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई है। नथवानी को जीत के लिए 28 वोट चाहिए, जबकि एनडीए के पास महज 24 विधायक हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग का डर बीजेपी की रणनीति पर भारी पड़ता दिख रहा है।
राजनीति से दूर… क्रिकेट के मैदान में ‘टाइगर’
जब रांची में सियासी तापमान चरम पर है, तब डुमरी विधायक जयराम महतो अपने क्षेत्र में क्रिकेट खेलते और महेंद्र सिंह धोनी की तरह छक्के लगाते नजर आए। उनकी यह बेफिक्री अब राजनीतिक संदेश मानी जा रही है। एक विधायक का वोट इस चुनाव का पूरा समीकरण बदल सकता है और इसी वजह से जयराम महतो पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
कौन हैं ‘टाइगर’ जयराम महतो?
* गिरिडीह के डुमरी से विधायक।
* झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख।
* स्थानीयता, खतियान और भाषा आंदोलन के मुखर चेहरा।
* युवाओं के बीच मजबूत पकड़।
* आक्रामक भाषणों के कारण समर्थक उन्हें ‘टाइगर जयराम’ कहते हैं।
गठबंधन की साख भी दांव पर
दूसरी ओर कांग्रेस-झामुमो गठबंधन के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। नामांकन के समय ही अंदरूनी नाराजगी सामने आ चुकी थी। अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राजनीतिक प्रबंधन की असली परीक्षा है। यदि कहीं भी वोटों का गणित बिगड़ा तो विपक्ष को बड़ा हथियार मिल जाएगा।
झारखंड का इतिहास देता है बड़ा संकेत
झारखंड में राज्यसभा चुनाव हमेशा चौंकाने वाले रहे हैं। 2008 में परिमल नथवानी ने झामुमो के ही विधायकों के समर्थन से चुनाव जीतकर बड़ा उलटफेर किया था। 2012 में भी क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों ने पूरे चुनाव को विवादों में डाल दिया था। यही वजह है कि इस बार भी हर वोट पर सियासी नजर है।
अगले 24 घंटे तय करेंगे सत्ता का संदेश
एक तरफ एनडीए की होटल पॉलिटिक्स, दूसरी तरफ कांग्रेस का दावा कि बीजेपी के विधायक उनके संपर्क में हैं, और बीच में जयराम महतो की रहस्यमयी चुप्पी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ‘माटी’ की राजनीति करने वाले जयराम महतो कॉरपोरेट चेहरे परिमल नथवानी का साथ देंगे, या फिर हेमंत सोरेन अपने गठबंधन की साख बचाने में कामयाब होंगे?
झारखंड की राजनीति में अगला 24 घंटे सिर्फ राज्यसभा का परिणाम नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय कर सकता है।