Sonia Gandhi : कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हाल ही में ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ को दिए एक इंटरव्यू में भारतीय राजनीति के कई अहम और संवेदनशील पन्नों पर खुलकर बात की है। इस बातचीत में उन्होंने 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस, देश में लगाई गई इमरजेंसी, इंदिरा गांधी की हत्या के दर्दनाक पलों और अपनी पार्टी की कमियों जैसे गंभीर विषयों पर बेबाक राय रखी है।
1. बाबरी ढांचे के गिरने पर रो पड़ी थीं सोनिया गांधी
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने टेलीविजन पर इस ढांचे को गिरते हुए देखा था, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
* उन्हें उस वक्त यह अहसास हो गया था कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके सहयोगियों द्वारा बनाए गए सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) भारत को बचाने के लिए अब एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़नी होगी।
* उन्होंने अपनी पार्टी (कांग्रेस) की कमियों को भी स्वीकार किया। सोनिया ने माना कि पार्टी के भीतर कुछ मामलों में लापरवाही और ‘लेसेज-फेयर’ (उदासीनता) वाला रवैया रहा, जिसने कहीं न कहीं बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति के उभार में योगदान दिया।
2. इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लगाना एक गलती थी
देश में 1975 में लगाई गई इमरजेंसी को लेकर सोनिया गांधी ने माना कि वह एक गलती थी। उन्होंने खुलासा किया कि इस फैसले को लेकर गांधी परिवार के भीतर भी मतभेद और तनाव था…
* राजीव गांधी का रुख: राजीव गांधी इस कदम के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने अपनी मां इंदिरा गांधी से आग्रह किया था कि वे इमरजेंसी लगाने के बजाय अगले चुनाव तक का इंतजार करें।
* संजय गांधी का प्रभाव: इसके विपरीत, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने इसके लिए जोर दिया था। एक फैमिली डिनर के दौरान तीखी बहस में संजय ने कहा था कि विपक्ष उनकी मां को बर्बाद कर देगा और उन्हें रोकने की जरूरत है।
* सोनिया गांधी के अनुसार, उस समय संजय गांधी का अपनी मां पर बहुत अधिक प्रभाव था। परिवार के भीतर तनाव बढ़ने के बावजूद इंदिरा गांधी ने राजीव की बात सुनने से इंकार कर दिया था। सोनिया का मानना है कि यदि उस वक्त संजय गांधी को काबू में रखा जाता, तो भविष्य के कई नुकसानों से बचा जा सकता था।
* हालांकि, सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि इंदिरा गांधी दिल से एक ‘डेमोक्रेट’ (लोकतांत्रिक विचारों वाली) थीं और इमरजेंसी का दौर खुद इंदिरा पर भी भारी पड़ रहा था, जिससे वे कभी सहज नहीं रहीं।
3. इंदिरा गांधी की हत्या के वे खौफनाक पल
सोनिया गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 को अपनी सास इंदिरा गांधी की हत्या के दिन को याद करते हुए वह खौफनाक मंजर बयां किपल…
* उस दिन घर पर गोलियों की आवाज (जिसे पहले पटाखे समझा गया था) सुनने के बाद जब वह इंदिरा गांधी के ऑफिस की तरफ दौड़ीं, तो उन्होंने देखा कि खून से लथपथ और गोलियों से छलनी उनका शरीर जमीन पर पड़ा था। (ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उनके ही सिख सुरक्षाकर्मियों ने इस हमले को अंजाम दिया था)।
* सोनिया ने बताया कि हर तरफ खून फैला हुआ था और उन्हें तुरंत महसूस हो गया था कि अब वह उनके किसी सवाल का जवाब नहीं देंगी।
* अस्पताल तक का वह सफर बेहद दर्दनाक और धीमा था। ट्रैफिक भले ही ज्यादा नहीं था, लेकिन उन्हें यह अंदर ही अंदर पता चल चुका था कि सब कुछ समाप्त हो चुका है।
4. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सोनिया गांधी के इन बशर्ते खुलासों के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी नेताओं ने इन बयानों को लेकर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल के और गरमाने के आसार हैं।