ध्रुव गुप्त
आईपीएस (पटना)
Teejan Bai : छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली तीजन बाई का निधन लोककलाओं की दुनिया की एक अपूरणीय क्षति है। पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक और प्रसिद्ध लोक गायन एवं नाट्य शैली है जिसमें महाभारत की कथाओं को संगीत और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इसकी दो शैलियां हैं – वेदमती और कापालिक। वेदमती शैली स्त्रियों के लिए हैं जिसमें वे बैठकर पंडवानी गाती हैं। कापालिक शैली पुरुषों के लिए है जिसमें वे खड़े होकर दमदार आवाज में गायन और अभिनय करते हैं। मात्र 13 साल की उम्र में जब तीजन ने पुरुषों के वर्चस्व वाली कापालिक शैली में गायन और अभिनय शुरू किया तो उनके रूढ़िवादी समाज के लिए यह सर्वथा नई चीज थी। इसके लिए उन्हें सामाजिक वहिष्कार तक झेलना पड़ा। संघर्ष के उन दिनों में उनकी प्रतिभा को पहचाना और मंच दिया रंगकर्मी मरहूम हबीब तनवीर ने जिसके बाद तीजन का जीवन ही बदल गया। उन्होंने देश भर में, देश के कई पूर्व प्रधानमंत्रियों से लेकर दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों के सामने और इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की ,मॉरिशस सहित कई- कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। तीजन बाई को भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे नागरिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।