Terrorist : हाल ही में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका को तीखी और स्पष्ट खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद पर अमेरिकी रवैया बेहद असंवेदनशील है, जो भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
इस बड़े बयान से जुड़ी मुख्य बातें….
* पाकिस्तान पर स्पष्ट निशाना: विदेश मंत्री ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे ऐसा ‘पड़ोसी देश’ बताया, जो आतंकवाद को अपनी जानबूझकर अपनाई गई नीति के रूप में इस्तेमाल करता है।
* अमेरिका की नजदीकियों पर सवाल: यह बयान अमेरिकी प्रशासन (विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) द्वारा पाकिस्तान के साथ बढ़ाई जा रही नजदीकियों और उसकी आतंकवाद-समर्थक भूमिका को नजरअंदाज किए जाने की पृष्ठभूमि में आया है।
* भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं की अनदेखी: जयशंकर ने जोर देकर कहा कि अगर भारत की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चिंता (आतंकवाद) को उसका कोई रणनीतिक साझेदार पूरी तरह नहीं समझता या उस पर सहानुभूति नहीं दिखाता, तो इससे रिश्तों में तनाव पैदा होना स्वाभाविक है।
* ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से फेरबदल: 2001 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमलों और ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में छिपे होने के खुलासे के बाद से अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवाद का मुख्य केंद्र मानता था। वर्तमान में इस नीति से दूरी बनाना भारत के लिए चिंता का विषय है।
भारत ने वैश्विक मंच से यह साफ संदेश दे दिया है कि आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कूटनीतिक समझौते या किसी देश की अनदेखी, भारत-अमेरिका संबंधों की प्रगति में एक बड़ी रुकावट बन सकती है।
