US India : ओमान के तट पर हाल ही में अमेरिकी सेना की तरफ से किए गए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई. ये मिसाइल हमला होर्मुज स्ट्रेट के पास ‘एमटी सेटेबेलो’ नाम के कॉमर्शियल टैंक पर किया गया था. ऐसे में फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच होने वाली बातचीत काफी अहम थी. 16 महीने बाद हुई इस द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने दोनों देशों के कॉमर्शियल जहाजों पर एकसाथ काम करने पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली दोनों इस मुद्दे पर ‘एक साथ काम करना’ जारी रखेंगे. ट्रंप ने कमर्शियल जहाजों के ऑपरेशन को ‘एक मुश्किल काम’ बताया.
भारतीय नाविकों के मुद्दे पर ट्रंप ने कोई शोक या अफसोस नहीं जताया. ट्रंप ने कहा कि मैंने इसके बारे में सुना, यह हमेशा से होता रहा है, लेकिन हम एक साथ काम करते हैं. हम उन सभी लोगों से प्यार करते हैं और वे बहुत अच्छे लोग हैं.
नाविकों की सुरक्षा सबसे पहले’
‘ अपनी शुरुआती बातचीत में US-ईरान मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के बारे में बात करते हुए, पीएम मोदी ने भारतीय की मौत का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा बहुत जरूरी है. पीएम मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस समझौते का पालन करते समय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. पीएम मोदी ने नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने की बात कही.
‘दो और कमर्शियल जहाजों पर भी किया था हमला’
अमेरिकी सेना ने दो और कमर्शियल जहाजों पर भी हमला किया, जिन पर भारतीय क्रू मेंबर सवार थे. इस घटना के बारे में अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना था कि इन जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी को तोड़ा गया था. इसके जवाब में, भारत ने तीन दिनों के भीतर दो बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया. इसके बाद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच तनावपूर्ण बातचीत हुई. यहां पर विदेशमंत्री जयशंकर ने बातचीत के दौरान भारतीय नाविकों की मौत पर “कड़ा विरोध” जताया था.