Jewar Airport : जेवर एयरपोर्ट का भव्य उद्घाटन, उत्तर प्रदेश को मिला विकास का नया द्वार

Siddarth Saurabh

Jewar Airport : जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आज उद्घाटन हो रहा है. पीएम मोदी इस अत्याधुनिक एयरपोर्ट का शुभारंभ करेंगे. इस एयरपोर्ट की यात्री संभालने की क्षमता हर साल 12 मिलियन होगी. एयरपोर्ट में एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब, एक इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन है.

भारत के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अपने पहले फेज के उद्घाटन के लिए तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले फेज और कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे. इस अवसर पर पीएम MRO फैसिलिटी का भी शिलान्यास करेंगे. एयरपोर्ट के पहले फेज की परियोजना का निर्माण करीब 11,200 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है.

प्रधानमंत्री सुबह करीब 11:30 AM बजे, वे गौतम बुद्ध नगर के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग का वॉकथ्रू करेंगे. इसके बाद, दोपहर करीब 12 बजे, प्रधानमंत्री नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-I का उद्घाटन करेंगे और इस मौके पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे.

उद्घाटन समारोह की मुख्य बातें

* पीएम सुबह 11:30 बजे टर्मिनल का निरीक्षण करेंगे.

* दोपहर 12 बजे फेज-I का उद्घाटन.

* कार्गो टर्मिनल का भी उद्घाटन.

* MRO (Maintenance, Repair & Overhaul) फैसिलिटी का शिलान्यास.

* इस मौके पर योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे.

NCR के लोगों के लिए बहुत अहम दिन: पीएम मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एयरपोर्ट की तस्वीरों के साथ सोशल साइट एक्स पर लिखा कि 28 मार्च उत्तर प्रदेश और NCR के लोगों के लिए बहुत अहम दिन है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज- I का उद्घाटन होगा. इससे कॉमर्स और कनेक्टिविटी बढ़ेगी. इससे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर भीड़ कम होगी.

यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे गौतम बुद्ध नगर जिले में मौजूद इस एयरपोर्ट को दिल्ली-NCR के लिए दूसरे इंटरनेशनल गेटवे के तौर पर डेवलप किया गया है. इससे पहले इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस इलाके के ज्यादातर एयर ट्रैफिक को हैंडल करता है.

300 सीसीटीवी, 7000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात

पुलिस सूत्रों का कहना है कि नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में सुरक्षा के लिए करीब सात हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. इसके साथ ही करीब 300 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे हर पल की निगरानी की जाएगी. इसके अलावा, शनिवार को सुबह सात बजे से 11 बजे तक नोएडा एक्सप्रेसवे एवं यमुना एक्सप्रेसवे पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मई 2018 में भारत सरकार से सैद्धांतिक मंज़ूरी मिली थी. इस प्रोजेक्ट को चार फेज में डेवलप किया जा रहा है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 29,560 करोड़ रुपए है. मॉडर्न, डिजिटल और एनर्जी-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी से बना यह एयरपोर्ट, चालू होने के बाद उत्तर प्रदेश भारत का पहला राज्य बन जाएगा, जहां पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट होंगे.

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि फेज-1 में, कंसेशनेयर द्वारा 6,876 करोड़ रुपए इन्वेस्ट किए जा रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन अधिग्रहण पर 4,406 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.

11,282 रुपए करोड़ की लागत

फेज-1 की कुल लागत लगभग 11,282 रुपए करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें शुरुआती सालाना कैपेसिटी 1.2 करोड़ पैसेंजर की होगी और बाद के फेज में कैपेसिटी को सालाना 70 मिलियन पैसेंजर तक बढ़ाने का प्रोविजन है.

यह एयरपोर्ट एक स्टेट-ऑफ-द-आर्ट मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर काम करेगा, जिसमें रोड, रेल, मेट्रो और रीजनल ट्रांज़िट सिस्टम शामिल होंगे. इससे पैसेंजर और कार्गो दोनों के लिए यात्रा का समय और लॉजिस्टिक्स लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है.

यरपोर्ट में 3,900 मीटर का रनवे है जो वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकता है. यह इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और एयरफील्ड लाइटिंग से लैस है ताकि हर मौसम में, चौबीसों घंटे ऑपरेशन को सपोर्ट किया जा सके. यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट डेवलपमेंट में से एक है.

5 रनवे वाला एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेस-वे के पास स्थित है, जो कि सीधे तौर पर दिल्ली-NCR की रफ्तार को बढ़ावा देगा. इतना ही नहीं, मेट्रो और प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी इसे और भी सुगम बनाएगी. यह देश का पहला 05 रनवे वाला एयरपोर्ट है. इसके रनवे की लंबाई करीब 3.9 किलोमीटर है, जो कि वाइड बॉडी एयरक्राफ्ट (बड़े विमानों) को संभालने में सक्षम है.

जानें कितने एकड़ में फैला एयरपोर्ट

खास बात यह है कि एयरपोर्ट पर 40 एकड़ में तो सिर्फ रिपेयर और मेंटेनेंस की व्यवस्था की गई. इस एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल 11,750 एकड़ में फैला हुआ है. पहले चरण में इस प्रोजेक्ट पर 11,200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. इसके चारों चरणों के निर्माण की कुल लागत 29,560 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती हैं. इसे बेशक कर पीएम मोदी के उद्घाटन के बाद खोल दिया जाए, लेकिन यहां से पहली उड़ान कब और किस शहर के शुरू होगी इसका फैसला अब तक नहीं हो पाया है.

कार्गो टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे पीएम

प्रधानमंत्री जिस कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे, उसकी शुरुआती कैपेसिटी सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन होगी, जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन किया जा सकता है. 40 एकड़ की MRO फैसिलिटी देश के अंदर एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस और रिपेयर कर सकेगी, जिससे एविएशन सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.

यमुना अथॉरिटी एरिया में डेवलप हुए इस एयरपोर्ट से आस-पास के इंडस्ट्रियल सेक्टर में ग्रोथ तेज होने की उम्मीद है. इससे रोजगार पैदा होगा, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा, हवाई यात्रा आसान होगी, और टूरिज्म को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिससे आखिरकार उत्तर प्रदेश की इकॉनमी मजबूत होगी.

यूपी की अर्थव्यवस्था का बनेगा इंजन

भौगोलिक रूप से चारों तरफ जमीन से घिरे (लैंडलॉक) राज्य उत्तर प्रदेश के लिए दुनिया के बाकी हिस्सों से सीधे जुड़ना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है. जेवर एयरपोर्ट इस बाधा को हमेशा के लिए खत्म कर देगा. राज्य सरकार और अधिकारियों का अनुमान है कि पूरी तरह से चालू होने के बाद यह हवाई अड्डा यूपी की जीडीपी में 1 प्रतिशत से अधिक का सीधा योगदान देगा. राज्य ने खुद को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, यह एयरपोर्ट उसमें एक रीढ़ की हड्डी साबित होगा. इस नई कनेक्टिविटी से न सिर्फ वैश्विक व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों को एक नई संजीवनी मिलेगी.

रोजगार में आएगा बड़ा उछाल

किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की सफलता इस बात से तय होती है कि उससे आम जनता को क्या फायदा मिल रहा है. एयर इंडिया सैट्स के पूर्व सीएफओ पंकज जायसवाल के अनुसार, यह देश का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा. इसकी सालाना क्षमता 7 करोड़ यात्रियों और लगभग 10 लाख टन कार्गो को संभालने की होगी. इसका सीधा फायदा हमारे किसानों को मिलेगा. फल, सब्जियां, फूल और डेयरी जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद अब सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेंगे. इस फार्म-टू-ग्लोबल मार्केट मॉडल से किसानों की आय में 20 से 30 प्रतिशत तक की ठोस बढ़ोतरी होने की संभावना है. वहीं, युवाओं के लिए भी रोजगार के कई नए दरवाजे खुलेंगे. शुरुआती पांच वर्षों में ही एयरपोर्टऑपरेशंस, सुरक्षा, रिटेल और ग्राउंड हैंडलिंग जैसे क्षेत्रों में 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) नौकरियां पैदा होंगी. इसके अलावा, लंबी अवधि में ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म, सप्लाई चेन और एमएसएमई (MSME) सेक्टर में 40 से 50 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने का भी अनुमान है.

हर सेक्टर में दिखेगा भारी बदलाव

इस मेगा प्रोजेक्ट का असर सिर्फ जेवर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे बेल्ट अब देश के प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में उभरेंगे. होटलों, लॉजिस्टिक्स पार्कों और डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ेगी. इसका असर यह होगा कि शहरीकरण का विस्तार बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा तक फैल जाएगा. इसके साथ ही, वाराणसी, मथुरा, वृंदावन और आगरा जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की वैश्विक पहुंच बेहतर होगी, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा. देश में अभी माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत 13-14 प्रतिशत के आसपास है, इस एयरपोर्ट के शुरू होने से सप्लाई चेन सुधरेगी और यह लागत काफी कम हो जाएगी.

दुबई और दोहा के वर्चस्व को मिलेगी चुनौती

एक मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल हब के रूप में डिजाइन किया गया यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) की भारी भीड़ को भी काफी हद तक कम करेगा. पांच रनवे की योजना के साथ, यह आने वाले समय में देश के सबसे बड़े एविएशन हब और एशिया-यूरोप के बीच एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट में तब्दील हो जाएगा. बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यह दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे स्थापित और व्यस्त हब के एक मजबूत विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. इतना ही नहीं, ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत जो विदेशी कंपनियां निवेश के लिए चीन का विकल्प तलाश रही हैं, वे अब सीधे यूपी की ओर रुख कर सकती हैं. इससे रक्षा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश आने की संभावना है.

व्यापार के लिए बनेगा बड़ा हब

कोई भी बड़ा एयरपोर्ट सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह रोजगार और व्यापार के नए मौके भी लेकर आता है. जेवर एयरपोर्ट को भी इसी सोच के साथ विकसित किया जा रहा है. यहां करीब 80 एकड़ में एक बड़ा कार्गो हब तैयार किया गया है, जहां शुरुआत में हर साल 2.5 लाख मीट्रिक टन माल संभालने की क्षमता होगी. आगे चलकर इसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकेगा. इसके अलावा, 40 एकड़ में विमानों के रखरखाव और मरम्मत (MRO) के लिए खास सुविधा बनाई जा रही है. इससे उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को तेज और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जो सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा.

कब शुरू होगी पहली उड़ान?

अधिकारियों के अनुसार, पहली उड़ान और कब और किस शहर के लिए शुरू होगी. इसके फैसला उद्घाटन कार्यक्रम के भी किया जाएगा. इस बात का फैसला होते ही टिकट बुकिंग पोर्टल 15 से 20 दिन पहले ही खोल दिया जाएगा, ताकि यात्री पहले से अपनी सफर की योजना बना सकें. बता दें कि कॉमर्शियल फ्लाइटों की बुकिंग अप्रैल से दूसरे हफ्ते से शुरू हो जाएगी.

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