US Iran Peace Deal : अमेरिका-ईरान जंग खत्म! 19 जून को होगी ऐतिहासिक पीस डील पर साइन, खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट; भारत को मिल सकती है बड़ी राहत

Bindash Bol

* ट्रंप का बड़ा ऐलान, दुनिया के सबसे अहम तेल रूट से हटेगा अमेरिकी पहरा; पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी टिकी नजर

US Iran Peace Deal : महीनों तक चले तनाव और युद्ध जैसे हालात के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार शांति की राह खुलती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता (Peace Deal) फाइनल हो चुका है। प्रस्तावित समझौते पर 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।
ट्रंप के मुताबिक, समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को फिर से खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी भी हटाएगा। यदि यह समझौता तय समय पर लागू हो जाता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

क्या हुआ है समझौते में?

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि दोनों देशों ने युद्ध समाप्त करने और समुद्री व्यापार को सामान्य करने पर सहमति बना ली है। समझौते के तहत…

* होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा।

* समुद्री व्यापार पर किसी तरह का अतिरिक्त टैक्स या शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

* अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा।

* लेबनान समेत क्षेत्र के विभिन्न मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई स्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनी है।

हालांकि, समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं और ईरान की ओर से अंतिम मंजूरी बाकी है।

होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से होकर गुजरती है।
28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के दौरान ईरान ने इस समुद्री मार्ग को बंद कर दिया था। जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी कर दी, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई।
अब पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब की मध्यस्थता के बाद दोनों देश समझौते के करीब पहुंच गए हैं।

कब खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट?

जानकारी के मुताबिक 19 जून को स्विट्जरलैंड में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि अंतिम कदम उठाने से पहले अमेरिका को अपने वादों पर भरोसा कायम करना होगा।

ईरान की तीन बड़ी शर्तें

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिका के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं…

* क्षेत्र मे सैन्य तनाव पूरी तरह समाप्त किया जाए।

* ईरान पर लगे आर्थिक और समुद्री प्रतिबंध हटाए जाएं।

* विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति जारी की जाए।

ईरान का कहना है कि इन मांगों पर ठोस कार्रवाई के बाद ही समझौता पूरी तरह लागू माना जाएगा।

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रस्तावित डील के 14 पॉइंट्स…

* युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए बंद किया जाएगा, इसमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल होगा।

* अमेरिका, ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा।

* अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाएगा और 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा।

* अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के इलाकों से हट जाएगी।

* ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी और ईरान को अपनी तेल कमाई का पैसा फिर से मिल सकेगा।

* अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की मदद देंगे।

* अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच बातचीत चलेगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर चर्चा होगी।

* ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत यह वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

* बातचीत के दौरान अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

* बातचीत के दौरान अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।

* ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से वापस की जाएंगी।

* समझौते का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी।

* अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी दिलाने की कोशिश होगी।

* ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके समर्थित प्रॉक्सी संगठनों के मुद्दे इस बातचीत का हिस्सा नहीं होंगे।

कौन से मुद्दे अभी भी अनसुलझे?

परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते में कहा गया है कि ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म किया जाएगा और उसकी निगरानी के लिए सख्त व्यवस्था बनाई जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इससे मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बयान अलग-अलग हैं।

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यूरेनियम को नष्ट किया जाएगा, जबकि ईरान का कहना है कि उसे अपने देश में ही कम संवर्धित रूप में रखने की अनुमति मिलेगी। यह समझौता अभी अंतिम शांति डील भी नहीं है। यह एक प्रारंभिक समझौता (MoU) है, जिसके बाद अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी। ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने साफ कहा है कि वह पहले देखेगा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा करता है या नहीं, उसके बाद ही अंतिम समझौते पर आगे बढ़ेगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही आता है। ऐसे में यदि यह समुद्री मार्ग सामान्य रूप से खुल जाता है, तो भारत के लिए तेल आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थिर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम पड़ सकता है और भविष्य में भारत को भी इसका फायदा मिल सकता है।

क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

फिलहाल इसका सीधा जवाब देना मुश्किल है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें डॉलर की कीमत, सरकार के टैक्स, तेल कंपनियों की लागत और वैश्विक मांग-आपूर्ति जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
हालांकि, यदि शांति समझौता सफल रहता है और तेल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाती है, तो आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है, जिसका लाभ भारत सहित कई देशों को मिल सकता है।

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