TMC : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सियासी संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी की संसदीय इकाई में टूट की अटकलों के बीच रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर टीएमसी के बागी सांसदों की अहम बैठक हुई। बैठक के बाद काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में बागी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने पहुंचा।
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने Nationalist Citizen Party (NCP) में विलय का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि यह पार्टी असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय है। सूत्रों का दावा है कि विलय के बाद यह गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देगा।
इससे पहले काकोली घोष दस्तीदार ने 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र लोकसभा स्पीकर को सौंपा था। पत्र में टीएमसी से अलग संसदीय दल बनाने का दावा करते हुए नए गुट को मान्यता देने और एनडीए को समर्थन देने की जानकारी दी गई थी।

टीएमसी के बागी सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की. उनमें काकली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सुदीप बनर्जी, सयानी घोष, माला रॉय, अरूप चक्रवर्ती, घाटल के सांसद दीपक अधिकारी (देव), यूसुफ पठान, जून माल्या, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, मिताली बाग, अबू ताहिर और खलिलुर्कहमान दिखाई दे रहे हैं. उनके साथ बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे भी हैं. कुल 22 सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की.

सुदीप बनर्जी का भी आया बयान
इस मामले में सुदीप बनर्जी का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि हमने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय का फैसला किया है लेकिन हम यह भी क्लेम करेंगे कि असली टीएमसी हम हैं। कोर्ट में भी मामले को लेकर जाएंगे.
उधर, टीएमसी नेतृत्व भी नुकसान को रोकने की कोशिश में जुट गया है। रविवार को अभिषेक बनर्जी की ओर से सांसद कार्ति झा आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा। पत्र में अनुरोध किया गया कि प्रस्तावित अलग गुट को मान्यता न दी जाए, क्योंकि यह संविधान और दल-बदल कानून की भावना के विपरीत है। दोनों नेताओं के स्पीकर आवास से निकलने के कुछ ही देर बाद बागी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा।
इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “ये लोग हमारी पार्टी छोड़ चुके हैं। अगर वे पश्चिम बंगाल में ‘ऑपरेशन लोटस’ के प्रभारी माने जाने वाले बीजेपी नेताओं से मिलते हैं तो इसमें कोई हैरानी नहीं है। हमने बीजेपी और एनडीए के खिलाफ चुनाव लड़ा था, ऐसे में एनडीए में शामिल होना पूरी तरह गलत है।”
टीएमसी में बढ़ते असंतोष और बागी सांसदों की सक्रियता ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी है, जो इस पूरे सियासी घटनाक्रम की दिशा तय कर सकता है।