Dhurandhar : सोशल मीडिया की गाली से उपन्यास तक: लेखक ने ऐसे दिया जवाब, ‘धुरंधर’ के किरदार से जुड़ी दिलचस्प कहानी

Bindash Bol

अपमान का जवाब शब्दों से — विवादित सोशल मीडिया शख्सियत बनी उपन्यास का सबसे जलील पात्र

Dhurandhar : बात तब की है जब परत लिख रहा था. एक साहब हैं फेसबुक पर, उन दिनों दिन भर हिन्दू देवी देवताओं को गाली दिया करते थे। इतनी अश्लील टिप्पणीयां कि कोई पढ़े तो शर्मा जाय। तब ये साहब फेसबुक के कवर फोटो में अपनी दोनों बेटियों की तस्वीर लगाए थे। मैं सोचता था, दो बेटियों का पिता किसी स्त्री के लिए इतना फूहड़ कैसे लिख सकता है… पर कुंठा इंसान से कुछ भी करा सकती है। और ऊपर से हमारे देश की अद्भुत व्यवस्था ऐसी है कि कोई दो कौड़ी का व्यक्ति भी बहुसंख्यक वर्ग के पूज्य प्रतिकों को गाली दे सकता है। वे अब भी यही करते होंगे, कुत्ते की पूँछ कभी सीधी थोड़े होती है।
खैर। तो तब अपना पहला उपन्यास परत लिख रहा था। अचानक साहब को उत्तर देने का एक तरीका सूझ गया। मैंने उपन्यास के एक पात्र को साहब का नाम दे दिया। पात्र लतखोर है, निहायत ही जलील। बार बार अपने पड़ोसियों से मार खाता है, और भी… इससे उसको तो कोई फर्क नहीं ही पड़ना था, उस कुपढ़ को तो पता भी नहीं होगा। पर मुझे सुकून मिला। और परत के वे सभी पाठक भी जो उस अभद्र को जानते थे, उन्हें भी अच्छा लगा।
धुरंधर फिल्म में मेजर इकबाल का सनकी बाप ब्रिगेडयर जहांगीर जब उसे गंदी गंदी गालियां देता है तो भारतीय दर्शकों को वैसे ही सुकून मिलता है। उतना आनंद तो तब भी नहीं आता जब जसकीरत उसे मार देता है। वह फूहड़ बुड्ढा परदे पर ठंढी हवा का झोंका बना कर आता है। और यकीनन उतना ही आनंद तब आता है जब गालियां सहते सहते थक चुका मेजर ऊब कर उस हवाबाज बुड्ढे की जीभ मरोड़ देता है।
एक दृश्य में वह बुड्ढा मेजर को जलील करता हुआ कुछ इस तरह की बात कहता है, ” तुमने भारत के पत्रकारों, कलाकारों, नक्सलीयों, लेखकों, स्टूडेंट यूनियन वालों को भर भर कर पैसे दिए, पर वे क्या कर पाए?” इस डायलॉग के बाद सिनेमा हॉल में बैठे एक एक दर्शक की आँखों के सामने वे सारे चेहरे उभर आते हैं जिनके लिए यह बात कही गयी है। यह यूँ ही तो नहीं, यह प्रतिष्ठा कमाने में उन महानुभावों को युगों लगे हैं।
कुल मिला कर बात यह कि मात्र दो तीन दृश्यों में दिखने के बाद भी यह पात्र लम्बे समय तक याद रहेगा। शोले के साम्भा की तरह, जिसके हिस्से में संवाद के नाम केवल “जी सरदार पुरे पचास हजार ” भर आया था।

कहीं पढ़ा, इस कलाकार का नाम सुखविंदर विक्की है। वैसे आप बताइये, परत के किस पात्र की बात कर रहे हैं हम?

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