Jharkhand :  4 दशकों का नक्सली अध्याय खत्म: प्रशांत बोस उर्फ किशन दा की जेल में मौत

Bindash Bol

Jharkhand : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को रांची के रिम्स अस्पताल में निधन हो गया. बिरसा मुंडा जेल में बंद 75 वर्षीय प्रशांत बोस की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था.  प्रशांत बोस प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) का टॉप लीडर और थिंक टैंक रह चुका था. वो पोलित ब्यूरो सदस्य भी रहा था. उसे किशन दा के नाम से भी जाना जाता था.

प्रशांत बोस संगठन के शीर्ष नेताओं में शामिल था और उसे महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था. वे भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाता रहा.

नक्सली संगठन में किशन दा के नाम से पहचान रखने वाला बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला था. उसने कई वर्षों तक संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व किया और रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई. उसका शुरुआती जुड़ाव माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) से था, जहां वो प्रमुख पद पर रहा.

वर्ष 2004 में जब एमसीसीआई और पीपुल्स वार ग्रुप का विलय हुआ और भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, तब उसे नए संगठन के पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया.

प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था. उस समय उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, 1 करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा पर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों में भूमिका रही थी.

करीब 75 वर्ष से अधिक उम्र के बोस लंबे समय से जेल में बंद था. उनकी मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, क्योंकि वो संगठन के महत्वपूर्ण और रणनीतिक थिंक टैंक नेता माना जाता था.

माओवादी थिंक टैंक प्रशांत बोस का शव लेने कोई नहीं पहुंचा!

करीब चार दशकों तक माओवादी संगठन के थिंक टैंक रहे प्रशांत बोस का शुक्रवार के मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पोस्टमार्टम कराया गया. लेकिन उनका शव लेने कोई नहीं पहुंचा. प्रशासन की ओर से कल परिजनों को पार्थिव शरीर सौंपे जाने की संभावना है.

पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने में प्रशांत बोस की भूमिका

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रशांत बोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रची थी. गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जांच अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि पुणे में भीमा कोरेगांव हिंसा और पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने में प्रशांत बोस की भूमिका थी. एनआईए की चार्जशीट में भी प्रशांत बोस का नाम सामने आया था. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 30 कांग्रेसी नेताओं की हत्या में उसकी भूमिका थी.

सांस लेने में गंभीर समस्या के बाद मौत

जेल प्रशासन के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे प्रशांत बोस को सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगी. आनन-फानन में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ले जाया गया. डॉक्टरों की विशेष टीम ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ और सुबह करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि कर दी. जेल और अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दी है.

4 दशकों तक प्रशांत बोस संगठन का ‘थिंक टैंक’

करीब चार दशकों तक सक्रिय रहे प्रशांत बोस को संगठन का ‘ माना जाता था. गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में बंद थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक बताई जाती है. लंबे समय से जेल में बंद रहने और बढ़ती उम्र के कारण वे विभिन्न शारीरिक बीमारियों से ग्रस्त थे. उनकी मृत्यु के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है. फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है.

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