ShreyasIyer : झुकना नहीं, जीतना सीखो: श्रेयस अय्यर की अनसुनी कहानी

Bindash Bol

* ताल्लुक बनाम टैलेंट: स्वाभिमान की जंग

* दुनिया आपको झुकाने की लाख कोशिश करेगी, पर याद रखना—बादशाह वही है जो ताज के लिए सर न झुकाए।

रेहान अहमद

ShreyasIyer : कहने को तो ये दुनिया टैलेंट को पूजती है, पर असलियत के सारा खेल होता है ताल्लुक का। आपको लगेगा कि आपके आस पास के लोग चाटने में अपना वक्त खराब कर रहे है,पर आप गलत है,साल दो साल बाद आप की हालत भी ऐसी हो जाएगी,तब आप भी उन्हीं की तरह बन जाएंगे,जिनकी चाटुकारिता पर आप कभी हंसते थे मजाक उड़ाते थें।आपको तब समझ आएगा कि आप खुद्दार नहीं, बेवकूफ थे।

आपको क्या लगता है?ये जो ऊंची ऊंची जगहों पर हुनर से बौने लोगों की जो भीड़ जमा है,क्या वो जादू टोने के दम पर खड़ी है?नहीं, कोई जादू टोना नहीं है, कोई secrets नहीं है। बस simple सी trick ये है कि सही वक्त पर सही आदमी का साथ पकड़ लीजिए,उसके चुटकुलों पर हंसिए, उसके शेर पर घायल हो जाइए।

बस यही चीज रिपीट में करते रहना है, कर ले गए तो,फिर किसी को फर्क नहीं पड़ेगा आपमें पोटेंशियल या टैलेंट है भी या नहीं।जैसे आकाश चोपड़ा स्टार स्पोर्ट्स छोड़कर सबसे पहले जियो के कमेंट्री पैनेल में आए थे, अब उन्हें क्या आता है क्या नहीं, ये तय है कि वो तो पैनल से कही नहीं जाने वाले।

पर क्या सभी को,देर सबेर ताल्लुक के आगे घुटने टेकने पड़ते है? नहीं बिल्कुल नहीं।कुछ होते है,जो मिट जाते है,पर बिछते नहीं,दुनिया ऐसे लोगों की गिनती तूचियों में करती है,क्योंकि अक्सर ऐसे बेवकूफों का अंजाम दुनिया के लिय मिसाल बन जाता है।

पर कुछ होते है, बहुत जिद्दी, बहुत टैलेंटेड,और बहुत मेहनती,जो दुनिया की ह मिसाल बदल कर रख देते है,मिसाल के लिए आप श्रेयस अय्यर को ही ले लीजिए। आप खुद ही सोचिए,एक खिलाड़ी जब पहली बार कप्तान बनता है तो अपनी टीम को 7 साल बाद प्लेऑफ,और फिर फाइनल में लेकर जाता है,पर फिर भी टीम से निकाल दिया जाता है।

फिर अगली बार वो नई टीम से जुड़ता है, और इस बार वो इस टीम को 12 साल बाद champion बनाता है,पर फिर भी अगले सीजन से निकाल दिया जाता है।जो ट्रॉफी उसने सालों की मेहनत से जीती थी, उसे उसे डिफेंड करने का भी मौका नहीं दिया जाता है। अय्यर के रिकॉर्ड,और उनकी एक टीम एक ठिकाने की दशकों की तलाश देखकर,कोई अंधा भी बता देगा कि अय्यर अब तक परफॉर्मेंस में नहीं,ताल्लुक में कमजोर पड़ रहे थे।

पर क्या सच में श्रेयस को ताल्लुक बनाने टूटने से फर्क पड़ता है? घंटा, फर्क पड़ता तो अब तक कब का ताल्लुक बनाना सीख लिया होता भाई ने,शॉर्ट बॉल की प्रॉब्लम भी तो ठीक की है न भाई ने,ताल्लुक भी ठीक कर सकता था।पर वही बात है न, भाई को कभी shortcut नहीं चाहिए था,सहारा नहीं चाहिए था, अगर उसे सब कुछ आसान बनाकर करना होता तो वो बहुत पहले कर लेता।

पंजाब की टीम कोई वायग्रा फांककर नहीं खेलती है जो अब तक अजेय है और कोई भी टारगेट उसके सामने safe नहीं दिखता,तो उसकी वजह खिलाड़ी से ज्यादा वो कप्तान है, जिसे टैलेंट एबिलिटी,और परफॉर्मेंस के अलावा कुछ नहीं दिखता,कुछ नहीं सुनाई देता। पंजाब का कप्तान एक ऐसा आदमी है,जो उस हाल में भी हार मानने को राजी नहीं होता, जिस हाल में लोग खेल छोड़ कर भाग जाते है।

मेरे दोस्त,आपकी जिंदगी में भी ऐसे मौके आएंगे,सबकी जिंदगी में आते है,जब आपको ऐस लगेगा कि झुक जाए, बिक जाए,लेट जाए चरणों में क्योंकि ये न करने पर जो नुकसान होगा वो आपके बड़ा भारी हो सकता है।इसलिए बेहतर है कि ताल्लुक पर ध्यान दे देना, पर अगर ये तुमसे नहीं हो रहा है,अगर तुम्हे लगता है कि कही तुम इस दुनिया के तौर तरीकों में मिसफिट तो नहीं हो,तब तुम एक बार श्रेयस अय्यर की कहानी याद कर लेना,the story of a king who didn’t kneel..

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