* अगली बार कोई कहे तुम लोगों ने क्या बनाया है, तो सीना ठोककर कहना— “हमने USB बनाया है!”
USB Inventor : भारत और दुनिया में जब भी तकनीक का ज़िक्र होता है, तो अक्सर सिलिकॉन वैली के कुछ गिने-चुने नाम ही उछाले जाते हैं। लेकिन पर्दे के पीछे कुछ ऐसे मूक नायक भी रहे हैं, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के पूरी मानव सभ्यता के जीने का तरीका बदल दिया। ऐसे ही एक युगांतकारी भारतीय इंजीनियर हैं— अजय भट्ट।
आज दुनिया भर के अरबों मोबाइल, कंप्यूटर, कैमरे और प्रिंटर जिस एक धागे से बंधे हैं, उसे हम USB (यूनिवर्सल सीरियल बस) कहते हैं। यह सिर्फ एक पोर्ट या केबल नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे उलझी हुई समस्या का सबसे सरल समाधान था।
सबसे हैरान और भावुक कर देने वाली बात? इस आविष्कार से अजय भट्ट ने व्यक्तिगत रूप से एक भी रुपया रॉयल्टी के रूप में नहीं लिया। उन्होंने अरबों डॉलर की दौलत को लात मारकर अपनी खोज को पूरी मानवता के लिए ‘मुफ़्त’ (Open Source) छोड़ दिया।
एक बेटी की परेशानी और दुनिया को मिला ‘
1957 में गुजरात के वडोदरा में जन्मे अजय भट्ट बचपन से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे। अमेरिका से मास्टर डिग्री करने के बाद, 1990 में उन्होंने दिग्गज टेक कंपनी Intel में कदम रखा। इसी दौरान एक घरेलू घटना ने इतिहास की दिशा बदल दी।
एक रात उनकी बेटी को स्कूल का होमवर्क प्रिंट करना था। लेकिन उस दौर में कंप्यूटर से प्रिंटर को जोड़ना किसी युद्ध जीतने जैसा था— हर डिवाइस के लिए अलग तार, अलग पिन और अलग पोर्ट। बेटी की इस झुंझलाहट ने अजय भट्ट के भीतर के वैज्ञानिक को जगा दिया। उन्होंने सोचा— “ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि दुनिया के सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सिर्फ एक ही कॉमन पोर्ट से जुड़ जाएं?”
जब दुनिया ने कहा ‘असंभव है’, तब भारतीय ज़िद ने कर दिखाया
जब अजय भट्ट ने यह क्रांतिकारी विचार अपने सीनियर अधिकारियों के सामने रखा, तो उन्हें पागल समझा गया। उनके बॉस तक ने कह दिया, “यह कभी सफल नहीं हो सकता, इस प्रोजेक्ट को बंद कर दो।”
लेकिन एक भारतीय इंजीनियर की ज़िद के आगे ‘असंभव’ शब्द को घुटने टेकने ही पड़े। अजय भट्ट ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने साथी इंजीनियर बाला कादम्बी के साथ मिलकर रातों की नींदें उड़ाईं। इसके बाद उन्होंने Microsoft, IBM, Compaq और NEC जैसी धुरंधर कंपनियों को एक मंच पर लाकर खड़ा किया और USB को दुनिया का ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ बना दिया।
एप्पल (Apple) को पीछे छोड़, ऐसे जीता पूरी दुनिया का दिल
* 1996 का धमाका: जब USB 1.0 लॉन्च हुआ, तो दुनिया इसकी ताकत देखकर दंग रह गई। इसके बाद आए USB 2.0 और 3.0 ने डेटा ट्रांसफर की रफ्तार को रॉकेट बना दिया।
* दिग्गजों से टक्कर: उस दौर में स्टीव जॉब्स की Apple अपनी ‘FireWire’ तकनीक को प्रमोट कर रही थी, जो बहुत महंगी थी। लेकिन अजय भट्ट का USB सस्ता था, बेहद सरल था और सबसे बड़ी बात— Intel ने इसे पूरी तरह ‘रॉयल्टी-फ्री’ रखा था। परिणाम? USB ने पूरी दुनिया पर फतह हासिल कर ली। आज धरती पर 10 अरब से ज़्यादा डिवाइस इसी तकनीक पर सांस ले रहे हैं।
विज्ञापनों के ‘रॉक स्टार’ और भारत के गौरव
साल 2009 में Intel ने अजय भट्ट के सम्मान में एक ऐतिहासिक विज्ञापन बनाया, जिसमें उन्हें किसी पॉप स्टार या ‘रॉक स्टार’ की तरह एंट्री करते दिखाया गया (दिलचस्प बात यह थी कि विज्ञापन में उनका किरदार एक एक्टर ने निभाया था)।
इतनी बड़ी प्रसिद्धि के बावजूद अजय भट्ट हमेशा ज़मीन से जुड़े रहे। उनके इसी निस्वार्थ और असाधारण योगदान को सलाम करते हुए, भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाज़ा, जो उनके महान कर्मों की सच्ची पहचान थी।
अजय भट्ट की यह गाथा हमें सिखाती है कि सच्ची सफलता बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि इस बात से नापी जाती है कि आपने दुनिया को कितना बेहतर बनाया है। उन्होंने पूरी दुनिया को एक तार में पिरो दिया और बदले में सिर्फ मानवता का कल्याण माँगा।
तो अगली बार जब कोई भारत की काबिलियत पर सवाल उठाए, तो अजय भट्ट का नाम लेना और कहना— “गर्व करो, दुनिया को आपस में जोड़ना हमारी रगों में है!”